उत्तराखंड की लगातार हो रही उपेक्षा को सहन न कर पाने के कारण ही मुझे कांग्रेस छोड़नी पड़ी। कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से भी मैने त्याग पत्र दे दिया है। यह कहना है सतपाल महाराज का।
महाराज ने कहा कि प्रदेश सरकार आपदा प्रभावितों को मकान बनाने के लिए सात लाख रुपये तो दे रही है पर उन्हें जमीन देने को तैयार नही है। यही हाल रहा तो पहाड़ तो पूरा खाली हो जाएगा।
हाल यह है कि विकास की सोच रखने वालों को कांग्रेस में लगातार उपेक्षित किया जा रहा है। और भी कई बाते हैं। कर्णप्रयाग रेल लाइन के लिए भूमि नहीं दी जा रही है, गैरसैंण में विधानभवन बनाने की बात थी पर उस भवन का अभी तक निर्माण भी शुरू नही हुआ। भाजपा में बिना शर्त शामिल हुआ हूं। मोदी के मिशन 272 के लिए काम करते हुए देश भर में भाजपा का प्रचार करूंगा।
ये मुद्दे बने असली कारण
इन मुद्दों पर सतपाल महाराज का मुख्यमंत्री हरीश रावत से मतभेद ने उन्हें पार्टी छोड़ने पर मजबूर किया।
पुनर्वास
पुनर्वास के लिए सरकार कुछ नहीं कर रही है। पुनर्वास के लिए स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए।
पलायन
आपदा प्रभावित क्षेत्रों में केवल सात लाख रुपये का मुवाअजा देकर इति श्री कर ली जा रही है। ऐसे में लोग इस पैसे से देहरादून और मैदानी क्षेत्रों में ही बस गए तो क्या होगा। सरकार की इस नीति से प्रदेश में पलायन बढ़ेगा। सीमांत क्षेत्र खाली हो जाएगा। ऐसे में देश की सुरक्षा को भी खतरा हो सकता है। इंटेलीजेंस को सीमा पर बसे हुए लोगों से ही तो गतिविधियों का पता मिलता है।
निर्माण कार्य
आपदा प्रभावित क्षेत्रों में निर्माण का कोई काम नही हो रहा है। सड़क और पुल नहीं बन रहे हैं। ऐसे में लोगों का जीवन दूभर हो गया है। क्षतिग्रस्त स्कूल भवन नहीं बन पा रहे हैं।
लोक सभा में भी खासे सक्रिय रहे महाराज
-उत्तराखंड के पांचों सांसदों में महाराज लोकसभा में मुद्दे उठाने में सबसे अव्वल रहे। महाराज ने कुल मिलाकर सदन में 174 बहसों में हिस्सा लिया। उन्होंने 150 सवाल उठाए। तीन पूरक सवाल उठाए। वे 12 व्यक्तिगत बिल लेकर आए। दस व्यक्तिगत संकल्प उन्होने सदन में रखे।
-केसी सिंह बाबा ने लोक सभा में 24 बहसों में हिस्सा लिए और 246 सवाल पूछे।
-प्रदीप टम्टा ने 21 बहसों में हिस्सा लिया और तीन सवाल पूछे
-हरीश रावत ने 74 बहसों में हिस्सा लिया और एक सवाल पूछा।
-राजलक्ष्मी शाह ने नौ बहसों में हिस्सा लिया और 26 सवाल पूछे।
सट्टा बाजार में भाजपा के भाव बढ़े, शेयर बाजार भी उछला
यह दावा किसी और का नहीं खुद महाराज का है। महाराज के मुताबिक भाजपा में शामिल होते ही सट्टा बाजार में भाजपा के भाव भी बढ़ गए हैं और शेयर बाजार में भी उछाल आया है। महाराज ने हालांकि यह स्पष्ट नही किया कि यह उनके भाजपा में शामिल होते ही कै से हो गया।
सतपाल महाराज के भाजपा में शामिल होने से साफ हो गया है कि कांग्रेस-भाजपा में कोई अंतर नही है। जितनी आसानी से इन दोनों पार्टियों केनेता एक पार्टी से उछलकर दूसरी पार्टी में शामिल हो जाते हैं, उससे यह साफ हो रहा है। ऐसे में लगता है कि इन दोनों पार्टियों में लड़ाई सिर्फ सत्ता सुख की ही है।
-इंद्रेश मैखुरी, माकपा माले प्रत्याशी
महाराज के पार्टी छोड़ने से कांग्रेस मजबूत ही होगी। वैसे भी महाराज एक बार पहले भी महाराज कांग्रेस छोड़ चुके हैं। महाराज का जनाधार इतना ही मजबूत होता तो आठ संसदीय चुनावों में से सिर्फ दो ही क्यों जीत पाते। साफ है कि महाराज के जाने से कांग्रेस को कोई फर्क नहीं पड़ने जा रहा है।
योगेंद्र खंडूरी, संयोजक उत्तराखंड कांग्रेस टास्क फोर्स