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जयकारों से गूंज उठा दरबार साहिब

Sat, 22 Mar 2014 09:35 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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फूलों की अनवरत बारिश और श्री गुरु रामराय के जयकारों के बीच झंडाजी के आरोहण के साथ ही श्री गुरु रामराय दरबार साहिब का 368वां झंडेजी का मेला प्रारंभ हो गया।
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विभिन्न प्रदेशों से आए श्रद्धालु आस्था के इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। दरबार साहिब प्रबंधन का दावा है कि पांच लाख श्रद्धालु इस अवसर पर मौजूद रहे।

श्री दरबार साहिब की परंपरा के अनुरूप होली के पांच दिन बाद झंडेजी का मेला प्रारंभ होता है। शुक्रवार सुबह से ही दरबार साहिब में झंडारोहण की तैयारियां शुरू हो गई थीं।

झंडारोहण की घोषणा

उत्तराखंड, यूपी, पंजाब, हरियाणा से आई संगतों ने दरबार साहिब में विधिवत पूजा-अर्चना और परिक्रमा की। झंडेजी को उतारने, पूजन करने, अभिषेक करने और नए गिलाफ चढ़ाने के बाद दोपहर बाद दरबार साहिब के महंत देवेंद्र दास महाराज झंडाजी के स्थायी मंच पर पहुंचे और झंडारोहण की घोषणा की।

साथ ही सैकड़ों श्रद्धालुओं ने 85 फीट ऊंचे झंडेजी को हाथों में थाम लिया। जयकारों और फूलों की वर्षा के बीच झंडेजी को एक-एक इंच कर झंडास्थल तक लाया गया। शाम चार बजकर सात मिनट पर झंडाजी को आरोहित किया।

झंडारोहण के साथ ही दरबार साहिब परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं के सिर झुक गए। आसमान में गुब्बारे छोड़ने और तालियों की गड़गड़ाहट के साथ मेले की विधिवत शुरुआत हो गई।

इस मौके पर बड़े अखाड़े से महंत महेश्वर दास, महंत रघुपति मुनि, कोठारी मोहन दास भी पहुंचे। विष्णु कुमार नौटियाल, भगवती प्रसाद सकलानी, भूपेंद्र रतूड़ी आदि ने कार्यक्रम में विशेष सहयोग किया।

लाइव आरोहण देख झूमे श्रद्धालु

झंडेजी के आरोहण के दौरान दरबार साहिब में पैर रखने के लिए भी जगह नहीं बचती। हर किसी में एक बार झंडेजी को छू लेने की होड़ सी रहती है।

भीड़ इस कदर रहती है कि जो व्यक्ति जहां खड़ा हो, घंटों तक वहीं रह जाता है। ऐसे में इस बार दरबार साहिब में प्रोजेक्टर और स्क्रीन के जरिये झंडारोहण की तस्वीरें लाइव दिखाई गईं। इससे वे लोग, जो झंडेजी के नजदीक नहीं पहुंच सके थे स्क्रीन पर तस्वीरें देख खुश नजर आए।

कब क्या हुआ
सुबह आठ बजे: झंडेजी को उतारा गया
सुबह नौ से दस बजे: झंडेजी का पूजन और अभिषेक
सुबह दस से दोपहर एक बजे: झंडेजी पर सादे गिलाफ चढ़ाए गए
दोपहर एक से तीन बजे: झंडेजी पर शनील के गिलाफ चढ़ाए गए
दोपहर तीन से साढ़े तीन: झंडेजी पर दर्शनी गिलाफ चढ़ाया गया
शाम 04:07 बजे: झंडेजी का आरोहण

सूक्ष्म रूप में उपस्थिति देते हैं गुरु रामराय

हर बार की तरह इस बार भी झंडारोहण होते ही एक बाज दरबार साहिब पहुंचा और झंडेजी की तीन परिक्रमा करने के बाद लौट गया। बाज के आते ही परिसर में जयकारे गूंज उठे।

महंत देवेंद्र दास ने बताया कि गुरु रामराय का संदेशवाहक बाज था। यह उन्हें बहुत प्रिय था। मान्यता है कि झंडारोहण के वक्त श्री गुरु रामराय ही सूक्ष्म रूप में (बाज के रूप में) श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देने पहुंचते हैं।

सप्तमी को नगर परिक्रमा
सप्तमी यानी 23 मार्च को परंपरानुसार दरबार साहिब से नगर परिक्रमा निकाली जाएगी। परिक्रमा सहारनपुर चौक, कांवली रोड होते हुए गुरु रामराय पब्लिक स्कूल बिंदाल पहुंचेगी। यहां आधे घंटे विश्राम के बाद परिक्रमा तिलक रोड, घंटाघर, गांधी रोड से रीठा मंडी होते हुए गुरु रामराय पब्लिक स्कूल भंडारी बाग में फिर विश्राम लेगी।

भंडारी बाग से महंतों के समाधि स्थल लक्खीबाग में परिक्रमा पहुंचेगी। यहां आधे घंटे रुकने के बाद श्रद्धालु दोपहर दो बजे तक दरबार साहिब पहुंचेंगे, जहां परिक्रमा संपन्न होगी। इसी दिन शाम को महंत देवेंद्र दास पंजाब से आई पैदल संगतों और महंतों को पगड़ी प्रसाद वितरित करेंगे। उधर, बिजनौर और मुरादाबाद की संगतें झंडारोहण के बाद लौट गईं।

पुलिस व्यवस्था रही चौकस

मेलास्थल पर सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने अस्थायी चौकी बनाई है। विभिन्न स्थानों पर लगे सीसी कैमरों पर पुलिसकर्मी लगातार नजर बनाए रहे।

झंडारोहण से कुछ देर पहले पुलिस ने तालाब और आसपास की गलियों में लगी रेहड़ियों, फड़ों को हटवा दिया। इस दौरान पुलिस को हल्का विरोध भी झेलना पड़ा। झंडारोहण के बाद लोगों की भीड़ रास्तों पर निकली तो यातायात पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए व्यवस्था संभाल ली।

सईद और शकील का बरसों पुराना सिलसिला
श्री गुरु रामराय दरबार आने वाले श्रद्धालुओं में हर धर्म, संप्रदाय के लोग शामिल होते हैं। ऐसे ही एक शख्स हैं रुड़की निवासी सईद। मुस्लिम होने के बावजूद सईद की दरबार साहिब में पूरी आस्था है।

सईद ने बताया कि वह 50 साल से हर बार झंडारोहण के दौरान दरबार साहिब आ रहे हैं। इसी तरह दून के शकील सिद्दीकी भी 25 साल से लगातार झंडारोहण में शामिल होते रहे हैं।
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संगत का किया स्वागत

नेताजी संघर्ष समिति ने संगतों का स्वागत किया गया। समिति ने संगत के लिए भंडारे की भी व्यवस्था की। समिति के केंद्रीय अध्यक्ष अरविंद कुमार गुप्ता ने कहा कि झंडा मेला दून का प्रचलित मेला है। इस मौके पर अरुण खरबंदा, मनीष गुप्ता, वरुण मल्होत्रा आदि ने सहयोग किया।

हर मन्नत हुई पूरी
मैं 30 साल से दरबार आ रही हूं। दरबार साहिब पर परिवार की पीढ़ियों पुरानी आस्था है। यहां मन्नत मांगने के बाद ही मेरे दादाजी का जन्म हुआ, तब से तो यहां आने की परंपरा बन गई। पहले माता-पिता के साथ आती थी, अब पति संग।
-सोनिया, फगवाड़ा पंजाब

मेरा भाई दरबार साहिब में मन्नत मांगने के बाद ही पैदा हुआ। तब से पूरा परिवार हर साल मेले में पहुंचता है। मुझे यहां आते हुए 25 साल हो गए हैं। दरबार साहिब में आज तक जो भी मांगा, वह हमेशा मिला है। मुझे, मेरे परिवार को दरबार पर पूरा विश्वास है।
-रानी, पंजाब

सांस्कृतिक विरासत है मेला
झंडाजी दरबार साहिब ही नहीं, अपने प्रदेश की भी सांस्कृतिक पहचान और विरासत है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु झंडारोहण देखने पहुंचते हैं। इस तरह यह संस्कृतियों के आदान-प्रदान का भी जरिया है। धार्मिक पर्यटन के लिहाज से भी झंडाजी का मेला लाभदायक है। झंडारोहण के सफलतापूर्वक संपन्न होने पर सभी श्रद्धालुओं, संगतों को बधाई। इस शुभ अवसर पर देश-विदेश से करीब पांच लाख श्रद्धालु दरबार साहिब पहुंचे।
-देवेंद्र दास महाराज, महंत, श्री गुरु रामराय दरबार साहिब
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