राजधानी देहरादून के सालावाला निवासी विक्रम बाजार में स्वेटर खरीदने निकले तो एक दुकान पर 50 फीसदी छूट का आफर भा गया। उन्होंने 760 रुपये एमआरपी वाला स्वेटर 380 रुपये में खरीद लिया।
घर आकर स्वेटर पहन लिया और स्टिकर बच्चे को खेलने को दे दिया। खेलते समय बच्चे से स्टिकर उधड़ गया। इसी बीच विक्रम की नजर स्टिकर पर पड़ी तो देखा उसके नीचे एक और स्टिकर लगा है। जिस पर स्वेटर की एमआरपी 380 रुपये थी। दरअसल, छूट के नाम पर स्टिकर के ऊपर 760 रुपये का नया स्टिकर लगाकर ग्राहक को भ्रमित किया गया था।
विक्रम तो बानगी भर हैं। छूट में लूट का यह सिलसिला बदस्तूर चल रहा है। बचा हुआ स्टाक निकालने के नाम पर ग्राहक खूब ठगे जा रहे हैं। सेल का यह खेल अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) बदले जाने तक ही सीमित नहीं है, मैन्युफैक्चरिंग डेट तक बदली जा रही है।