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जगद्गुरु हंसदेवाचार्य बोले, टूट रहा जनता का सब्र, तरीका कोई भी हो अब तो बस राम मंदिर चाहिए

Thu, 29 Nov 2018 08:41 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हरिद्वार
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राम मंदिर को लेकर अपनी राय रखते संत
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जगद्गुरु रामानंदाचार्य हंसदेवाचार्य महाराज ने कहा कि तरीका कोई भी हो, अब तो राम मंदिर बनना चाहिए। इसके लिए चाहे सरकार संसद में कानून बनाए या फिर न्याय पालिका से रास्ता निकले। अब तो देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 

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वीआईपी घाट पर बुधवार को स्पर्श गंगा अभियान की ओर से आयोजित जन जागरण साइकिल यात्रा के समापन और सम्मान समारोह में भाग लेने के बाद पत्रकारों से वार्ता करते हुए जगद्गुरु रामानंदाचार्य हंसदेवाचार्य महाराज ने कहा कि देश अब राम मंदिर चाहता है। न्यायालय से पहले ही देर हो चुकी है। अब इस बारे में जनता अब सब्र करने वाली नहीं है। उन्होंने बताया आगामी नौ दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बड़ी सभा का आयोजन किया जाएगा।

अयोध्या में 25 नवंबर को हुई धर्म सभा के बाद यह बैठक काफी महत्वपूर्ण है और इसके राम मंदिर को लेकर चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार की नियत पर किसी को कोई शक नहीं है, लेकिन जनता अब राम मंदिर देखना चाहती है।
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उन्होंने बताया कि हरिद्वार सहित उत्तर भारत के विभिन्न जनपदों से नौ दिसंबर की सभा में भाग लेंगे। पूरे परिदृश्य पर विचार करने के साथ ही कोई न कोई सकारात्मक रास्ता निकल सकेगा, ऐसी उम्मीद भी उन्होंने जताई।  

जो राम का नहीं, वो किसी काम का नहीं: राजराजेश्वराश्रम

जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि दुनियाभर में राम को आदर्श मानने वाले जनमानस अब जल्दी से जल्दी अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यदि जल्दी ही राम मंदिर नहीं बनता है तो सरकार को वर्ष 2019 में होने वाले चुनावों में नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि जनता ने भाजपा को वोट विकास के लिए, जीएसटी और नोटबंदी के लिए नहीं दिया था बल्कि राम मंदिर बनाने के लिए दिया था। शंकराचार्य ने कहा कि जो राम का नहीं वह हमारे किसी काम का नहीं।  

बुधवार को कनखल स्थित जगद्गुरु आश्रम में शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वश्वराश्रम महाराज ने अमर उजाला से वार्ता करते हुए कहा कि राम मंदिर के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का रवैया नकारात्मक है, लेकिन केंद्र सरकार का रवैया भी सकारात्मक नहीं है। क्योंकि सत्ता में आने के साढ़े चार साल बाद अब सत्ताधीशों को राम की याद आई है। जबकि सत्ता मिलने के तुरंत बाद सबसे पहले राम मंदिर का निर्माण किया जाना चाहिए थे, क्योंकि जनता ने वोट मंदिर निर्माण के लिए ही दिया था। उन्होंने कहा कि जो भूल तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से हुई थी और बाद में उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा था।

ऐसे ही भूल मोदी सरकार कर रही है। उन्होंने कहा कि बिना देर करे अब सरकार को भूमि का अधिग्रहण कर राम जन्मभूमि मंदिर न्यास को सौंप देनी चाहिए, ताकि मंदिर का निर्माण हो सके। उन्होंने कहा कि जिस तरह से अब माहौल बन रहा है, उससे ऐसा भी लगता है कि दुनिया भर में राम को आदर्श मानने वाले जनमानस तो चाहता है कि मंदिर जल्द से जल्द बन जाए, लेकिन संभवत: भगवान राम की फिलहाल इच्छा नहीं है। क्योंकि जब पूरी दुनिया यह चाह रही थी कि राम को राज तिलक हो, तब उन्हें वनगमन हो गया था।
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कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत ने लिया आशीर्वाद 

ऐसे में राम मंदिर के लिए आंदोलन कर रहे लोगों को भगवान श्रीराम की शरण में जाना चाहिए और कहना चाहिए कि हमारा पुरुषार्थ तो अब थक चुका है। अब भगवान श्रीराम ही मंदिर निर्माण के लिए कृपा करें।  

स्पर्श गंगा साइकिल रैली के समापन समारोह और मेधावियों के सम्मान समारोह में भाग लेने आए प्रदेश के कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत ने जगद्गुरु आश्रम में पहुंचकर शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज से आशीर्वाद लिया।

इस दौरान प्रदेश की प्रगति और सुख समृद्धि के लिए उन्होंने स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज से चर्चा की। इस दौरान जगद्गुरु शंकराचार्य ने उन्हें राज्य के कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। इसके बाद कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य से भी मिलने गए और उनसे भी आशीर्वाद लिया। 
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