कुमाउं विवि के दीक्षांत समारोह में प्रसून जोशी
कुमाऊं विश्वविद्यालय का 15वां दीक्षांत समारोह बुधवार को डीएसबी परिसर के एएन सिंह सभागार में आयोजित किया गया। इसमें राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने फिल्म सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष एवं प्रख्यात गीतकार प्रसून जोशी को मानद और 22,177 विद्यार्थियों को पीएचडी, डी. लिट, स्नातक और परास्नातक की डिग्रियां प्रदान की।
इस मौके पर उन्होंने पलायन को अपने भाषण का केंद्र बिंदु रखते हुए कहा कि राज्य के विश्वविद्यालयों में क्षेत्र के उद्योगों के अनुसार पाठ्यक्रम संचालित किए जाने की जरूरत है। इससे उद्योगों को दक्ष मानव संसाधन मिलने के साथ ही यहां के युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार के अवसर मिलेंगे। इससे राज्य से होने वाले पलायन पर भी रोक लग सकेगी।
राज्यपाल ने कहा कि केंद्र सरकार ने देश के बीस संस्थानों को इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेन्स का दर्जा देने का निर्णय लिया है। कहा कि कुमाऊं विश्वविद्यालय को केंद्र की इस सूची में स्थान पाने का प्रयास करना चाहिए।
राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने राज्य के जल संकट पर भी चिंता जताई। कहा कि राज्य में पानी के कई स्रोत हैं जिनको संरक्षण की आवश्यकता है। दीक्षांत समारोह के माध्यम से राज्यपाल ने राज्य के युवाओं से जल संरक्षण और पलायन रोकने पर काम करने की अपील की। उच्चशिक्षा राज्यमंत्री धन सिंह का समारोह में शामिल होने का कार्यक्रम अंतिम समय में रद्द हो गया।
महिला सशक्तिकरण पर उत्तराखंड से सीख लें दूसरे राज्य
प्रसिद्ध गीतकार और सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी ने कहा कि उत्तराखंड में महिलाओं ने सफलता की अनोखी इबारत लिखी है। यहां महिलाएं पढ़ी-लिखी और आत्मनिर्भर हैं। दूसरे प्रदेशों और विश्व के कुछ हिस्सों को उत्तराखंड से महिला सशक्तिकरण पर सीख लेने की जरूरत है। जिस तरह की शक्तिशाली और जुझारू महिलाएं प्रदेश में देखने को मिलती हैं वैसी महिलाएं कहीं भी नहीं देखी जातीं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की महिलाएं ही भटके हुए पुरुषों को रास्ते पर ला सकती हैं। उन्होंने महिलाओं पर कविता सुनाते हुए कहा कि सने हाथ माटी की खुशबू लिए, रची धूप माथे पर बूंदे लिए, जाने कितने बाजू तू बांहों में लिए, कितनी राहत तू अपनी छाहों में लिए।
कुमाऊं विवि के 15वें दीक्षांत समारोह में अपने संबोधन में उन्होंने कहा पहाड़ का आदमी निश्छल और विनम्र होता है। जब यहां का व्यक्ति निकल कर बड़े शहरों में पहुंचता है तो उसे छल का पता चलता है। कुमाऊं विवि की ओर से दिए गए सम्मान को उन्होंने भावनाओं से जुड़ा सम्मान बताया। बताया कि उनका बचपन अल्मोड़ा में वन और नदियों के इर्द-गिर्द बीता है। कुमाऊंनी भाषा उनकी धमनियों में दौड़ती है। भाषा सभी की मां होती है। छात्र-छात्राओं के सीखने का सिलसिला हमेशा चलता रहता है। विद्यार्थियों को कभी भी अपनी प्रैक्टिस बंद नहीं करनी चाहिए।
किस फैकल्टी को कितनी डिग्रियां
पीएचडी - 158
डी.लिट - 05
व्यावसायिक पाठ्यक्रम - 826
बीए - 9840
बीएससी - 4305
बी.कॉम - 2530
एम.कॉम - 397
एमए - 2504
एमएससी - 1612
इन मेधावियों को मिला सम्मान
कुलपति स्वर्ण पदक, परास्नातक : प्रीति ढेक, निकिता गुप्ता, कुसुम पांडे, मुक्ता कनवाल, सपना बिष्ट, काजल श्रीवास्तव, गुलाफ शाह अंसारी, नीतू रानी, आस्था नेगी, मीनाक्षी पाठक, हेमलता, पूनम शाही, प्रदीप कुमार, निखलेश सिंह मेहता, अरविंद सिंह, पूजा, ज्योति शर्मा, दीक्षा अग्रवाल, सपना पंत, किरनदीप कौर, अंबिका अग्निहोत्री, अनुभव मेहरा, किशन सिंह बिष्ट, ललित मोहन जोशी, आशीष शर्मा, चित्राक्षी पंत, प्रीति फुलेरा, शिखा तिवारी।
किस फैकल्टी को कितनी डिग्रियां
कुलपति स्वर्ण पदक-स्नातक : नीतू कौर, अनुस्था शाही, गीतांजली गोस्वामी, मनीषा जोशी, वसुंधरा लोधियाल, निधि बिष्ट, मनीष भाकुनी, कविता मनराल, मनीष यादव, स्वाति सिंह, संदीप, दिव्यांशु उज्ज्वल।
गौरा देवी स्वर्ण पदक : नीतू कौर, मनीषा जोशी, कविता मनराल, स्वाती सिंह।
प्रायोजित स्वर्ण पदक : मनीष भाकुनी (आईसीएसआई सिग्नेचर अवार्ड), कुसुम पांडे (पद्मश्री सुखदेव पांडे स्मारक), आकांक्षा सैनी (डॉ. डीएस भाकुनी, सीडीआरआई लखनऊ), निखलेश मेहता (ओम भगवती प्रेम सिंह नेगी, हिमाचल प्रदेश), स्वाती सिंह (ठाकुर इंद्र सिंह नयाल मेमोरियल, हिमाचल प्रदेश), हेमलता (कलावती साहित्य पुरस्कार ट्रस्ट, अल्मोड़ा), कृष्णा सिंह बिष्ट, मुक्ता कनवाल (सीताराम जिंदल फाउंडेशन), संगीता रावत (संस्थापक अमर उजाला स्व. मुरारी लाल माहेश्वरी मेमोरियल अवार्ड) प्रदीप कुमार, प्रिया बमेठा (कोठारी एकता धर्म शिक्षाश्री अवार्ड)।