हरिद्वार को सनातन धर्मावलंबियों का गढ़ माना जाता है। पिछले 20 वर्षों से इस नगर को आध्यात्मिक राजधानी भी कहा जाने लगा है।
इसके बावजूद भगवा वोटरों की संख्या यहां पर बहुत ही सीमित है। कनखल, हरिद्वार और ऋषिकेश की संत बेल्ट में कुल मिलाकर करीब 12 हजार ही मतदाता हैं।
एक हजार आश्रमों में 12 हजार वोट
कुंभ और अर्द्धकुंभ जैसे विशाल पर्वों पर लाखों साधु-संत धर्मनगरी में डेरा जमाते हैं। तब ऐसा अहसास होता है कि मानों इन संतों के निवास इसी नगरी में हो।
हरिद्वार और ऋषिकेश में कुल मिलाकर साधुओं के आश्रमों की संख्या करीब एक हजार हैं। संतों के इन गढ़ों में स्थायी रूप से रहने वाले वोटरों की संख्या सिर्फ 12 हजार के आसपास है।
संतों के अधिकांश मत एक पार्टी विशेष को जाते रहे हैं। अलबत्ता, समय-समय पर यह दृष्टिकोण बदला भी है।
बड़े संतों के आशीर्वाद की होड़
प्रत्याशियों में होड़ लगी रहती है कि वे संतों के गढ़ में जाकर आशीर्वाद ग्रहण कर लें। बड़े संतों का आशीष लेने तो देश के अन्य भागों से भी प्रत्याशी समय निकालकर आते रहते हैं।
हरिद्वार के अनेक प्रमुख संतों ने चुनावी अभियान के दौरान कईं राज्यों में स्टार प्रचारक की भूमिका निभाई है। अब कुछ बड़े संतों का डेरा काशी में लगने जा रहा है। जहां तक हरिद्वार का सवाल है, इस क्षेत्र के सभी चुनाव में संतों के वोट अहम रोल अदा करते हैं।