सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई सूचना को देने में ही विद्युत विभाग को चार माह का समय लग गया।
हालांकि आरटीआई के तहत सूचना तीस दिन के अंदर-अंदर देने का प्रावधान है। सूचना देने में की गई देरी को देखते हुए राज्य सूचना आयुक्त विनोद नौटियाल ने संबंधित लोक सूचना अधिकारी पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
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हद तो यह है कि सूचना देर से देने के पीछे भी अजीब तर्क दिया गया।
बतौर लोक सूचना अधिकारी विद्युत वितरण खंड रुड़की के उप खंड अधिकारी का कहना था कि कार्यालय में रंग रोगन होने के कारण आवेदन इधर-उधर रख दिया गया और इस कारण सूचना देना वे भूल गए।
लोक सूचना अधिकारी को सूचना देने की याद तब आई जब राज्य सूचना आयोग की ओर से नोटिस जारी हुआ।
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हरिद्वार में भगवानपुर के रहने वाले पूर्व सैनिक कुंवर पाल सिंह ने रुड़की वितरण खंड से ग्रामीण फीडर भगवानपुर और पुहाना से 15 से लेकर 30 सितंबर 2013 के बीच की गई सप्लाई की जानकारी मांगी थी।
यह सूचना देने में लोक सूचना अधिकारी को चार माह का समय लग गया। लोक सूचना अधिकारी के भूल जाने के तर्क को भी राज्य सूचना आयुक्त विनोद नौटियाल ने सिरे से खारिज किया।
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विनोद नौटियाल ने रंग रोगन होने के कारण आवेदन इधर-उधर रख दिए जाने को सरकारी संपत्ति के प्रति लापरवाही करार दिया। विनोद नौटियाल के मुताबिक रंग रोगन की वजह से सरकारी संपत्ति को अव्यवस्थित नहीं किया जा सकता।
आयुक्त ने इस आधार पर लोक सूचना अधिकारी पर पांच हजार रुपए जुर्माना लगाया।