नौ बर्खास्त विधायकों के भाजपा के पाले में आने से पार्टी के भीतर पैदा हो रहे नए समीकरणों पर राष्ट्रीय सेवक संघ (आरएसएस) भी सतर्क है।
बागियों को अहम जिम्मेदारी देने की संभावना पर संघ कार्यकर्ताओं के रुख को लेकर सबसे ज्यादा चिंता है। इससे उनके मनोबल पर क्या असर होगा यह जानने के लिए खासकर संघ पृष्ठभूमि और जमीनी कार्यकर्ताओं की थाह ली जा रही है।
मौजूदा वक्त में भाजपाइयों में हर कोई यह जानने को बेताब है कि आलाकमान बर्खास्त विधायकों को कितनी तवज्जो देने के मूड में है। कुछ पुराने कार्यकर्ताओं का तर्क है कि जुम्मा जुम्मा ‘हाथ’ का साथ छोड़ भाजपाई हुए इन नेताओं को ज्यादा तरजीह देने से कर्मठ कार्यकर्ताओं के मनोबल पर उल्टा असर पड़ेगा। तो कुछ कह रहे हैं कि इससे पार्टी की ताकत बढ़ेगी।