मुकदमा दर्ज करने बाद तत्कालीन कोतावल मनोज मैनवाल ने हैदर अली, रिहान उर्फ आरिश व एक अन्य को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके बाद इस मामले की जांच तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक अमरजीत सिंह को सौंपी गई। उन्होंने पांच अप्रैल 2022 को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रुड़की जिला हरिद्वार रमेश सिंह की अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। कोर्ट ने मामले में तीसरे अभियुक्त को विधि विवादित किशोर घोषित किया था।
जिसका मामला जुवेनाइल कोर्ट में चल रहा है। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश रमेश सिंह ने गवाहों साक्ष्यों के आधार पर हैदर अली और रिहान उर्फ आरिश को दोषी माना। अदालत ने हैदर अली को फांसी की सजा और 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। जबकि दूसरे अभियुक्त आरिश को सश्रम आजीवन कारावास और 50 हजार का जुर्माने की सजा सुनाई है।