सड़क दुर्घटना में व्यक्ति की मौत के मामले में फरार चल रहे इनामी को पुलिस ने करीब 19 साल बाद गिरफ्तार किया है। पुलिस से बचने के लिए आरोपी 2002 से दिल्ली, हरियाणा और ऋषिकेश में अपने ठिकाने बदलता रहा। आखिर में ऋषिकेश को उसने अपना ठिकाना बनाया। यहां साप्ताहिक पत्रिका निकाली और खुद उसका प्रधान संपादक बन गया। इतना ही नहीं, आरोपी ने पकड़े जाने के डर से अपना हुलिया बदलने के साथ गढ़वाली भाषा भी सीख ली। पुलिस ने उसको कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है।
शनिवार को सिविल लाइंस कोतवाली में एसएसपी सेंथिल अबूदई कृष्णराज एस ने प्रेसवार्ता कर बताया कि वर्ष 2002 में रुड़की लाइंस कोतवाली क्षेत्र में एक कार से हादसा हुआ था। इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। पुलिस ने कार चालक संजय कुमार (29) निवासी मकान नंबर 166/1 मोहल्ला रामपुरी, कोतवाली मुजफ्फरनगर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया था। कुछ दिन बाद वह जमानत पर जेल से बाहर आ गया था।
इसके बाद से कोर्ट में तारीख पर नहीं पहुंच रहा था। कई बार उसे कोर्ट ने पेश होने के आदेश दिए, लेकिन वह नहीं पहुंचा। इस पर पुलिस ने उसके ऊपर ढाई हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया था। तभी से पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। पुलिस ने उसके परिजनों से जानकारी ली तो पता चला कि उस पर कुछ लोगों की देनदारी भी थी, उनके दबाव बनाने पर वह घर से फरार हो गया था।
पुलिस ने उसकी तलाश में परिजनों और रिश्तेदारों के मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल खंगालनी शुरू की। आखिरकार पुलिस को सफलता मिल गई। पुलिस ने शुक्रवार रात आरोपी को रंधावा कांप्लेक्स खेरी खुर्द नेपाली फार्म, थाना रायवाला से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने बताया कि पुलिस से छिपता हुआ पहले दिल्ली, हरियाणा और फिर ऋषिकेश आ गया था। यहां उसने हुलिया बदला और गढ़वाली भाषा सीख ली।
इसके बाद खेरी खुर्द के पते से आधार कार्ड बनवा लिया। इसके बाद एक पत्रिका निकाली और प्रधान संपादक बनकर काम करने लगा। उसने अपना कार्यालय भी खोल लिया था। हुलिया बदलने और गढ़वाली सीखने के बाद किसी को उस पर शक नहीं हुआ था। पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया। टीम में कोतवाली प्रभारी अमरचंद शर्मा, एसआई रणजीत खनेड़ा, विनोद चपराना, प्रवीण कुमार शामिल रहे।
विनोद का नेटवर्क आया काम
जिस आरोपी को पुलिस 19 साल से नहीं तलाश पाई थी, उसे कोतवाली में तैनात विनोद चपराना ने कुछ ही दिनों में सलाखों के पीछे भेज दिया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, विनोद चपराना ने उसके परिजनों और रिश्तेदारों के मोबाइल नंबर एकत्रित किए। कई बार इन नंबरों पर आने वाली कॉल की जानकारी जुटाई, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद वह लगातार इस पर काम करते रहे। आखिरकार आरोपी का मोबाइल नंबर मिल गया। पुलिस ने सत्यापन किया तो नंबर उसी का निकला। विनोद चपराना के कार्य और नेटवर्क की एसएसपी, एसपी देहात ने प्रशंसा की।