परिवहन निगम के चक्का जाम के ऐलान पर शासन की पाबंदी पूरी तरह से बेअसर रही। निगम कर्मचारियों ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। किसी रूट पर निगम की बस संचालित नहीं हुई। उधर, शासन ने पाबंदी का आदेश तो दिया, लेकिन हड़ताल के समर्थन में काम नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की।
प्रमुख सचिव परिवहन एस रामास्वामी ने मंगलवार को छह माह की अवधि के लिए उत्तराखंड परिवहन निगम में कार्यरत कर्मियों की समस्त सेवाओं को अत्यावश्यक सेवाएं घोषित करते हुए हड़ताल आदि को निषेध कर दिया था। लेकिन शासन के आदेश के बावजूद रोडवेज कर्मचारी बुधवार को 24 घंटे के चक्काजाम का हिस्सा बने।
कर्मचारी यूनियनों ने परिवहन सेवाओं को प्रदेश भर में ठप रखा। प्रदेश के अन्य निगमों ने परिवहन के चक्का जाम को नैतिक समर्थन दिया। अब सरकार के सामने बड़ी चुनौती प्रतिबंध के आदेश को आधार बनाकर हड़ताल में शामिल कर्मचारियों पर कार्रवाई करने की होगी। निगम के हजारों कर्मचारियों पर कार्रवाई मुश्किल है।