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पाबंदी बेअसर, रोडवेज कर्मी भी रहे हड़ताल में शामिल

Thu, 03 Sep 2015 12:07 PM IST
ब्यरो/अमर उजाला, देहरादून
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परिवहन निगम के चक्का जाम के ऐलान पर शासन की पाबंदी पूरी तरह से बेअसर रही। निगम कर्मचारियों ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। किसी रूट पर निगम की बस संचालित नहीं हुई। उधर, शासन ने पाबंदी का आदेश तो दिया, लेकिन हड़ताल के समर्थन में काम नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की।
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प्रमुख सचिव परिवहन एस रामास्वामी ने मंगलवार को छह माह की अवधि के लिए उत्तराखंड परिवहन निगम में कार्यरत कर्मियों की समस्त सेवाओं को अत्यावश्यक सेवाएं घोषित करते हुए हड़ताल आदि को निषेध कर दिया था। लेकिन शासन के आदेश के बावजूद रोडवेज कर्मचारी बुधवार को 24 घंटे के चक्काजाम का हिस्सा बने।

कर्मचारी यूनियनों ने परिवहन सेवाओं को प्रदेश भर में ठप रखा। प्रदेश के अन्य निगमों ने परिवहन के चक्का जाम को नैतिक समर्थन दिया। अब सरकार के सामने बड़ी चुनौती प्रतिबंध के आदेश को आधार बनाकर हड़ताल में शामिल कर्मचारियों पर कार्रवाई करने की होगी। निगम के हजारों कर्मचारियों पर कार्रवाई मुश्किल है।
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सरकार का ट्रेड यूनियनों को समर्थन

प्रदेश सरकार ट्रेड यूनियनों की मांगों के समर्थन में है। श्रम मंत्री हरीश दुर्गापाल ने ट्रेड यूनियन की हड़ताल को जायज बताया। कहा कि केंद्र श्रम कानूनों में बदलाव कर श्रमिकों से अन्याय के पक्ष में नहीं है। ट्रेड यूनियनों की मांगें जायज हैं, जिसकी अनदेखी केंद्र को नहीं करनी चाहिए।

परिवहन निगम में हड़ताल को प्रतिबंधित करने पर श्रम मंत्री ने कहा कि परिवहन आवश्यक सेवाओं के तहत आता है, जिससे सीधी जनता प्रभावित होती है, ऐसे में उन सेवाओं को बाधित करने से रोकना सरकार की जिम्मेदारी है।

शासन के आदेश के बाद निगम कर्मचारियों के हड़ताल पर जाना अवैधानिक है। हमने चक्का जाम से हुए निगम को नुकसान और हड़ताल में शामिल होने के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों की पहचान के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है।
-बृजेश संत, एमडी परिवहन निगम।
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