जिलों की सड़क सुरक्षा समिति की यह जिम्मेदारी होगी कि वह अपने जिले में बड़े हादसे होने की स्थिति के लिए इमरजेंसी मेडिकल प्लान तैयार रखे। हादसे होने पर एंबुलेंस और अस्पतालों के बीच आपसी तालमेल बनाए। यह भी सुनिश्चित करेगी कि हादसे होने पर अलग-अलग तरह की एंबुलेंस उपलब्ध हो। महीने में से कम से कम एक बार इस जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक होगी।
प्रदेश में हर साल सड़क हादसों में सैकड़ों लोग अपनी जान गंवाते हैं। पिछले तीन माह में ही कई ऐसे बड़े हादसे हो चुके हैं, जिनमें बस या पिकअप खाई में गिरने से बड़ी संख्या में जनहानि हुई है। हाल ही में 22 फरवरी को टनकपुर चंपावत हाईवे पर हुए हादसे में 14 की मौत हुई। इसी दिन, पौड़ी में शिक्षकों की कार खाई में गिरने से तीन शिक्षकों की मौत हो गई।
21 मार्च को उत्तरकाशी में ट्रक खाई में गिरने से दो की मौत हुई, चार घायल हुए और पांच लापता हो गए। इससे पहले 31 अक्तूबर को चकराता में बड़ा सड़क हादसा हुआ था, जिसमें 11 की मौत हो गई थी। इतने हादसों के बीच निश्चित तौर जिला सड़क सुरक्षा समिति एक नई उम्मीद जगाएगी।