उत्तराखंड आपदा में मंदाकिनी नदी ने बड़ी भूमिका निभाई थी। मंदाकिनी के प्रवाह बदलने से केदारनाथ में भारी तबाही हुई थी। अभी भी मंदाकिनी का प्रकोप जारी है। जिला मुख्यालय से करीब 14 किमी दूर सिल्ली कस्बा आपदा से बुरी तरह प्रभावित हो चुका है। यहां मंदाकिनी नदी का तल लगभग 12 मीटर उठ चुका है।
पानी कम होने के बावजूद नदी भवनों के बगल से बह रही है। सिल्ली और विजयनगर जैसी ही स्थिति सोनप्रयाग, चंद्रापुरी, सौड़ी, बेडूबगड़, बनियाड़ी, चाका, जवाहरनगर, गंगानगर और सुमाड़ी बाजार की है। केदारनाथ जलप्रलय से आई बाढ़ के कारण मंदाकिनी नदी का तल (रिवर बेड) कई स्थानों पर 20 से 40 फीट ऊपर उठ चुका है।
सुरक्षा को लेकर आशंकित
दिक्कत यह है कि नदी में भारी मात्रा में रेत, पत्थर (सिल्ट) जमा होने के कारण पानी का रुख बस्तियों की ओर है। अभी तक नदी से कटाव रोकने के लिए तटबंध (चेकडेम) नहीं बनाए गए हैं। ऐसी स्थिति में आपदा से किसी तरह बचे घरों में रह रहे लोग अपनी सुरक्षा को लेकर आशंकित हैं।
अगली बरसात पड़ेगी भारी
यहां समय रहते बचाव के प्रबंध नहीं किए गए तो अगले की वर्ष बरसात इन गांवों पर भारी पड़ सकती है। पूर्व कनिष्ठ उप प्रमुख रमेश बेंजवाल, व्यापार संघ महामंत्री देवी प्रसाद गोस्वामी का कहना है कि आपदा में मकान बह गया है। अब जो जमीन बची है, वहां मकान बनाना चाह रहे हैं। लेकिन नदी का स्तर काफी ऊपर होने के कारण डर लग रहा है।