शनिवार रात आंधी के साथ हुई मूसलाधार बारिश से पिथौरागढ़ के सोबला में धौलीगंगा को डायवर्ट करने के लिए बनाई गई दीवार टूट गई।
थम गई 19 ग्राम पंचायतों के लोगों की धड़कनें
इससे वहां करीब साढ़े चार घंटे बाढ़ से हालात रहे। दारमा घाटी के सोबला, कंज्योति, दर, बौंगलिंग, उमच्या, तेजम, सेला, तल, नागलिंग, बालिंग, ढांकर, बोन सीपू, मारछा समेत 19 ग्राम पंचायतों के लोगों की धड़कनें थम गईं।
लोगों की आवाजाही के लिए बनाया अस्थायी पैदल रास्ता भी ध्वस्त हो गया है। ग्रामीणों समेत सामान लेने गए घोड़े-खच्चर रास्ते में फंसे रहे।
करीब साढ़े चार घंटे बाद जब पानी घटा तो लोगों ने राहत की सांस ली। धारचूला के एसडीएम प्रमोद कुमार का कहना है कि सीपीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को नदी डायवर्जन का काम तेजी से करने को कहा गया है।
उन्होंने बताया कि नदी की दिशा मोड़ने के बाद जून 2013 की आपदा में बहे सोबला के मोटर पुल को दोबारा बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। चट्टान को काटकर सड़क तैयार करने की योजना है।
वहीं आपदा प्रभावित मदकोट में भी एक घंटे हुई मूसलाधार बारिश से नदी-नाले उफान पर हैं जिससे लोग दहशत में हैं।
श्रद्धालुओं को करना पड़ा परेशानी का सामना
चंपावत जिले के विभिन्न हिस्सों में करीब आधे घंटे बारिश हुई। टनकपुर में बारिश के साथ ओले भी गिरे जिससे मां पूर्णागिरि धाम के दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा।
चंपावत में अंधड़ ने गोलज्यू महोत्सव में लगे दस से अधिक विभागों के स्टॉल क्षतिग्रस्त हो गए। पहाड़ों पर हुई झमाझम बारिश से तराई के बाजपुर इलाके में भी बाढ़ जैसी स्थिति हो गई।
यहां लेवड़ा नदी का पानी लोगों के घरों में घुस गया। सड़कें जलमग्न हो गईं। इधर, रविवार सुबह हल्द्वानी में भी झमाझम बारिश हुई। इससे तापमान करीब तीन डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है।
मैदानी इलाकों में बारिश का कोई पूर्वानुमान नहीं था। लेकिन हवाओं की दिशा बदलने से तराई-भाबर में जमकर बारिश हुई। यह बारिश आम, अमरूद, लीची के लिए लाभदायक है। रविवार को 21.2 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है।
- डॉ. एचएस कुशवाहा, पंतनगर कृषि विवि के मौसम विज्ञानी