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स्मार्ट सिटी के खिलाफ सड़क पर रिटा. उच्चाधिकारी

Thu, 10 Dec 2015 01:10 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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देहरादून में वसंत विहार काली मंदिर के पास बड़ी संख्या में रिटायर्ड आईएएस, आईपीएस, आईएफएस व सैन्य अधिकारी, उनकेपरिजन, श्रमिक तथा क्षेत्रवासी एकत्र हुए।
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यहां उन्होंने ऐलान किया कि किसी भी दशा में चाय बागान में स्मार्ट सिटी नहीं बनने देंगे। सरकार को चेतावनी दी गई कि अगर उसने फैसला वापस नहीं लिया तो न्यायालय की शरण ली जाएगी। मांग की गई कि इस मामले में सरकार पारदर्शिता के साथ जनमत संग्रह कराए।

मंगलवार को बड़ी संख्या वसंतक विहार, इंदिरानगर, पंडितवाड़ी में रहने वाले अवकाश प्राप्त उच्चाधिकारी तथा इन इलाकों केनिवासी वसंत विहार काली मंदिर के पास एकत्र हुए। सोसायटी के चेयरमैन वीआर सागर व प्रेजीडेंट प्रताप सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार भारी भ्रष्टाचार में लिप्त है। चाय बागान प्रकरण कुछ और नहीं बल्कि बड़े घोटाले का जीता जागता उदाहरण है।
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चाय बागान पर स्मार्ट सिटी बनने से वसंत विहार, इंदिरा कालोनी, पंडितवाड़ी क्षेत्र तबाह हो जाएगा। यहां की शांति और सुकून का विनाश हो जाएगा। रिटायर्ड मेजर जनरल वाईएस नेगी, पुलिस महानिरीक्षक एसएस कोठियाल, ब्रिगेडियर बी. नौटियाल ने कहा कि सरकार के खिलाफ बड़ी लड़ाई मिलकर लड़ी जाएगी।

इसमें सभी वर्गों को शामिल किया जाएगा। प्रदेश सरकार आत्मघाती कदम उठा रही है। कारपोरेट व बड़े राजनीतिक घरानों के लिए वह देहरादून को नरकिस्तान बनाने का काम कर रही है। हम दून को नरक नहीं बनने देंगे।

इस मौके पर दून स्कूल के रिटायर्ड डीन मोहन जोशी, हेमवंती जोशी, लोकनिर्माण विभाग के रिटायर्ड वरिष्ठ अधिकारी एएस बिष्ट, कर्नल आर जखमोला, आम आदमी पार्टी नेता एम मुंडेपी, चाय बागान श्रमिक समेत बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी शामिल हुए। इसके बाद पंडितवाड़ी तक जुलूस निकाला गया। यहां सरकार विरोधी नारे लगाए गए। साथ ही चाय बागान बचाने को भी जबरदस्त नारेबाजी हुई।

...जब श्रमिक उर्मिला ने किया रिटायर्ड अफसरों को संबोधित
देहरादून। हरबंसवाला में रहने वाली श्रमिक उर्मिला ने रिटायर्ड उच्चाधिकारियों के समक्ष बेहद जोशीला व प्रेरित करने वाला भाषण दिया। उन्होंने कहा कि हमारे लिए यह लड़ाई कोई राजनीति या फैशन नहीं बल्कि जीने मरने का सवाल है। इसलिए अमीर गरीब सभी इसको संयुक्त तौर पर लड़ेंगे। इसमें महिलाएं और बच्चे भी आगे आएंगे। इसपर रिटायर्ड अधिकारियों ने मन से तालियां बजाई।

चाय बागान प्रकरण की जड़ में छिपे हैं गहरे राज

1989-1990 देहरादून के जिलाधिकारी रहे रिटायर्ड आईएएस अधिकारी प्रताप सिंह भले ही बुजुर्ग हो गये हैं। लेकिन उनका हौंसला आज भी बुलंद है। वह कहते हैं कि मुझे देहरादून की भूमि व्यवस्था व भू-स्वामित्व की गहरी जानकारी है। प्रदेश सरकार चाय बागानों का स्वरूप बदलकर बहुत गलत फैसला कर रही है।

भले ही सरकार ने टी प्लांटेशन एक्ट व सीलिंग एक्ट का तोड़ निकाल लिया हो। लेकिन नैतिक व पर्यावरणीय और सामाजिक तौर पर यह गलत है। गंभीर स्वर में उन्होंने बताया कि चाय बागान भूमि के स्वामित्व तथा इसकी मिल्कियत के स्वरूप में गहन जटिलता है। उनके पास तमाम ऐसे सबूत व जानकारियां जिससे सरकार कटघरे में खड़ी हो जाएगी।

अगर इस सारे प्रकरण की जड़ में जाया जाए तो बवंडर मच जाएगा। लेकिन राजनीतिक भ्रष्टाचार ने विरोध को कुंद कर दिया। नौकरशाहों के भी हाथ बंध गए हैं। लेकिन न्यायपालिका से उम्मीद है। अगर सरकार ने अपना रवैया नहीं बदला तो खराब स्वास्थ्य होने के बावजूद वह आखिरी सांस तक लड़ाई लड़ेंगे।

आखिर सुप्रीम कोर्ट तो है ही। लेकिन इससे पहले हाईकोर्ट व नेशनल ग्रीन ट्रियूब्नल का सहारा ले सकते हैं। रिटायर्ड आईएएस सिंह का कहना है कि सरकार सुविचारित नीति के तहत चाय बागान का स्वरूप बदल रही है। यह बहुत ही खतरनाक है। इसके बाद जो खेल होगा उससे इलाकाई ही नहीं बल्कि देश की सुरक्षा खतरे में पड़ेगी।
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