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देहरादून के एतिहासिक स्थल संवारेंगे युवा

Thu, 10 Dec 2015 01:08 PM IST
रेनू सकलानी/ अमर उजाला, देहरादून
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जाम, धूल-धुआं और भीड़ की हड़बड़ी में कोई एतिहासिक स्थलों की बात करना भी मुनासिब नहीं समझता है।
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ऐसे समय में दून के कुछ युवाओं का एतिहासिक स्थल की देखरेख और इन्हें प्रचारित करने के लिए आगे आना काबिल-ए-तारीफ है। लोगों के लिए मिसाल बने ये युवा कलेक्ट्रेट परिसर के पीछे एतिहासिक कुएं की मरम्मत करेंगे।

युवाओं के इस संगठन ने विभागों का भी ध्यान इस ओर खींचा है। नगर आयुक्त नितिन भदौरिया ने उनके प्रयास को सराहते हुए अभियान में निगम को भी शामिल किया है। कुएं के आसपास अतिक्रमण को हटाने के साथ ही जल्द कुएं की हालत सुधारी जाएगी।
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युवाओं के संगठन का नाम फोकस है। कचहरी के पीछे जर्जर हालत में 200 साल पुराने कुएं को बचाने के लिए संगठन प्रयासरत है। इसकी सराहना करते हुए नगर निगम ने कुएं की मरम्मत का जिम्मा लिया है। संगठन के युवा जब यह प्रस्ताव लेकर नगर आयुक्त के समक्ष पहुंचे तो उन्होंने तुरंत सहमति दे दी।

साथ ही युवाओं को भरोसा दिया कि वह इस बाबत डीएम से बात करेंगे, ताकि भविष्य में भी इसका मेंटिनेंस बेहतर तरीके से हो सके। संगठन के अध्यक्ष एवं डीएवी कॉलेज में बीकॉम तृतीय वर्ष के दानियल जमशेद बताया कि उनकी नजर में शहर के ऐसे कई एतिहासिक स्थल हैं जिन्हें वह बचाने के लिए प्रयास कर रहे हैं।

बताया कि कुएं को वह हेरिटेज प्वाइंट बनाना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि उनके साथियों ने मिलकर कुछ और एतिहासिक स्थल खोजे हैं, जिनपर वह आगे काम करेंगे। दानियल के अलावा उनके संगठन में स्वेता यादव, आयुष अग्रवाल, पीयूष गुप्ता, पराग यादव है।

एतिहासिक महत्व
कुएं का निर्माण साल 1823 में हुआ था। तत्कालीन दून के डिप्टी कलेक्टर एफ जे शोहर ने इसका निर्माण करवाया था। उस दौरान दून में पानी का लेवल बहुत नीचे था। इसके चलते शहर में पानी कि कमी हो गई थी। इसके अलावा पूरे शहर में कहीं भी कुआं नहीं था। जिसे देखते हुए डिप्टी कलेक्टर एफजे शोहर ने इस कुएं का निर्माण करवाया था।
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यह एक बहुत अच्छी कोशिश है। हमारा ध्यान भी इस ओर नहीं गया था। मेरी कोशिश है कि जिलाधिकारी महोदय से वार्ता कर इस कुएं को नगर निगम के अंतर्गत ला सकूं। अगर उनकी इजाजत मिल पाई तो आगे भी कुएं की बेहतर मेंटेनेंस हो पाएगी।
- नितिन भदौरिया, नगर आयुक्त
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