विभागों के पुनर्गठन का मामला अधर में लटक कर रह गया है। पुनगर्ठन की सुस्त रफ्तार का ही हाल है कि कर्मचारियों के आंदोलन सर उठा रहे हैं और विभागों का अपना काम भी प्रभावित हो रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देश और मुख्य सचिव के रिमाइंडर भेजे जाने के बाद भी विभागों की यह सुस्ती टूट नहीं रही है।
प्रदेश में कई विभाग ऐसे हैं जिनका पुनर्गठन राज्य स्थापना के बाद से नहीं हुआ है। इसी तरह कई विभागों की नियमावली भी नहीं है। पुनर्गठन के तहत विभागों के ढांचे में बदलाव कर विभागों के काम काज को पटरी पर लाना था।
इसी तरह नियमावली लागू होने पर कर्मचारियों के पदोन्नति और अन्य मसलों का समाधान हो पाता, पर विभागों की सुस्ती के चलते यह सारा मामला अधर में लटका हुआ है। यही कारण है कि आंदोलनरत अधिकतर कर्मचारी संगठनों की मांग पत्र में पहला बिंदु विभागों के पुनगर्ठन का ही रहता आया है।
लोक निर्माण विभाग, उद्यान, कृषि, पंचायत, वन, ऊर्जा सहित एक दर्जन से ज्यादा विभाग हैं जिनके पुनर्गठन की मांग लंबे समय से की जा रही है।