मुस्लिमों को आरक्षण देने की मांग को लेकर पिरान कलियर में रैली का आयोजन किया गया। मुस्लिम आरक्षण संघर्ष समिति की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में उलेमाओं, अलग-अलग पार्टियों के नेताओं ने शिरकत कर आरक्षण के समर्थन में आवाज बुलंद की। सभा के बाद बिना परमिशन रैली निकाल रहे समिति के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोक लिया। हंगामे के दौरान कुछ नेताओं ने गिरफ्तारी देने का प्रयास भी किया। बाद में नायब तहसीलदार के माध्यम से सरकार को ज्ञापन भेजा गया।
मुस्लिम आरक्षण संघर्ष समिति की ओर से पिरान कलियर में हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि आजादी के बाद से सभी पार्टियां मुस्लिमों को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करती आई हैं। किसी भी दल ने मुस्लिमों की दशा और दिशा सुधारने में ध्यान नहीं दिया।
मौलाना हारून ने कहा कि देश की आजादी में उलेमाओं की अहम भूमिका रही, लेकिन उनकी कुरबानी को भुला दिया गया। आज मुस्लिम नौजवान बेरोजगार हैं। समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुहेल अख्तर ने कहा कि आरक्षण मिलने तक लड़ाई जारी रहेगी। हम सड़कों पर उतरकर मुख्यमंत्री आवास का घेराव से भी पीछे नहीं हटेंगे। केंद्र सरकार की भी ईंट से ईंट बजा दी जाएगी।
परमिशन न होने पर पुलिस ने रैली को रोका
सभा को मौलाना यासीन, दिलशाद मंसूरी, राशिद अली, फिरोज, जुबैर, नाहिद कुरैशी, हाजी शेरु, तसव्वर अली आदि ने संबोधित किया। सभा के बाद बिना परमिशन लेने रैली निकालने पर समिति के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोक लिया।
हालांकि सभा की परमिशन नहीं होने की बात भी सामने आई। पुलिस की जानकारी में पता चला कि सिर्फ डीएम को सूचना दी गई थी। रैली रुकने के बाद नायब तहसीलदार को ज्ञापन देकर कार्यक्रम समाप्त कर लिया गया।
फोटो दिखाकर जुटाई भीड़
पिरान कलियर में शनिवार को हुई मुस्लिम आरक्षण रैली का प्रचार-प्रसार महीनों से पूरे जिले में किया जा रहा था। जिसमें कई बड़े मुस्लिम नेताओं के फोटो प्रकाशित कराए गए थे। इन नेताओं को सुनने और देखने के लिए देहात से बड़ी संख्या में लोग कलियर पहुंचे। लेकिन, कोई भी बड़ा नेता तो दूर जमियत उलेमा उत्तराखंड के सदर मुफ्ती रियासत, सहारनपुर से इमरान मसूद, यूपी विधायक मौलाना जमील, मेरठ के पूर्व विधायक हाजी याकूब, उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के सदस्य मौलाना अखलाक भी कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। मुख्य वक्ता नजर न आने पर लोग धीरे-धीरे कार्यक्रम से उठकर जाने लगे।