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राज्यसभा प्रत्याशी घोषित करने के बाद कांग्रेस में फिर असंतोष!

Sun, 29 May 2016 12:52 PM IST
सुधाकर भट्ट/ अमर उजाला, हल्द्वानी
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हरीश रावत - फोटो : पीटीआई
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उत्तराखंड मुख्यमंत्री हरीश रावत के करीबी प्रदीप टम्टा को कांग्रेस की ओर से उत्तराखंड से राज्यसभा का प्रत्याशी घोषित किये जाने से अब कांग्रेस में असंतोष फिर पनपने के हालात हैं। यह असंतोष भी उसी कुमाऊं से उभर रहा है, जहां मुख्यमंत्री हरीश रावत अपनी राजनीतिक जमीन पुख्ता करने की कोशिश में हैं।
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पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा को मुख्यमंत्री हरीश रावत के नजदीकी लोगों में गिना जाता रहा है। इससे पहले कांग्रेस ने राज्य सभा में कुमाऊं से महेंद्र सिंह माहरा को भेजा था। माहरा भी रावत के नजदीकी हैं। हरीश रावत इससे पहले सल्ट से विधायक रह चुके और अपने नजदीकी रंजीत रावत को चौथे तल पर स्थापित करने की कोशिश के चलते भी विवादों में रह चुके हैं।

हाल ही में कांग्रेस के नौ बागी सदस्यों ने भी बगावत का झंडा बुलंद करते समय रावत पर अपने लोगों को आगे बढ़ाने और बाकी सदस्यों की न सुनने का आरोप जड़ा था। पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की तो सबसे बड़ी शिकायत ही यह थी।
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खासी मशक्कत के बाद इस झटके से उबरे रावत ने एक बार फिर साबित किया कि अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत करने की कोशिश में असंतोष और नाराजगी की उन्हें खास परवाह नहीं है।
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बाजपुर विधायक यशपाल आर्य भी अंदरखाने नाराज

हरीश रावत - फोटो : AmarUjala
हालांकि, राजनीतिक जमीन पुखता करने की इस कोशिश मेंरावत को कुमाऊं से ही झटका मिल सकता है। इस कदम से बाजपुर विधायक यशपाल आर्य भी अंदरखाने नाराज बताये जा रहे हैं। आर्य कांग्रेस में खुद को दलित नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश में हैं।

ऐसे में अपने सामने एक और ध्रुव खड़ा करने को आर्य शायद ही पचा पाए। सूत्रों का यह भी कहना है कि आर्य राज्यसभा के लिए खुद के लिए भी कोशिश कर रहे थे। आर्य के लिए यह राजनीतिक विरासत को संजोने का भी मामला है। आर्य अपने बेटे संजीव आर्य को आगे बढ़ाने की कोशिश में है। वहीं, हरीश रावत के नजदीकी लोग प्रदीप टम्टा को कांग्रेस राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी की पसंद बता रहे हैं।

दूसरी ओर, रावत के सामने पीडीएफ की नाराजगी का खतरा भी बढ़ गया है। पीडीएफ हरीश चंद्र दुर्गापाल केनाम पर जोर दे रहा था। दुर्गापाल को कांग्रेस के ही एक  धड़े का समर्थन हासिल है। इतना होने पर भी दुर्गापाल को हाशिये पर डाल दिये जाने से कांग्रेस का यह धड़ा रावत के लिए मुसीबत खड़ी कर सकता है।

राज्यसभा के प्रत्याशी के रूप में प्रदीप टम्टा पर दाव खेल कर हरीश रावत ने यह भी साफ कर दिया है कि वे अब भी दबाव की राजनीति का मोहरा बनने को तैयार नहीं है।
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