उपनल में भर्तियां पूर्व सैनिक संगठनों के साथ राजनीतिक दलों के निशाने पर हैं। कुछ पूर्व सैनिक संगठन निगम में भारी गड़बड़ियों का आरोप लगाते रहे हैं जबकि कुछ भर्तियां पूरी तरह पूर्व सैनिक व आश्रितों के लिए आरक्षित चाहते हैं।
भर्तियों को लेकर लगने वाले आरोपों पर राजनीति भारी हो जाती है, जिससे असल मुद्दे पर्दे के पीछे चले जाते हैं। पूर्व सैनिकों की संजीदा पहल नहीं होने से सरकार भी आउटसोर्सिंग पर भर्तियों में फेरबदल को लेकर गंभीर नहीं है।
सरकार का स्वार्थ यह है कि अगर उपनल, पीआरडी और हिल्ट्रान में भर्तियों की गाइडलाइन तय हो जाएगी तो न केवल भर्तियों में उसका दखल बंद होगी बल्कि इनकी आड़ में प्राइवेट आउटसोर्सिंग एजेंसियां के माध्यम होने वाली व्यापक भर्तियों का खेल बंद हो जाएगा।
आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन पर भारी सरकार
आउटसोर्सिंग के लिए स्पष्ट गाइडलाइन जारी नहीं करना ऐसा विवादित मुद्दा है जिसकी आड़ में भर्तियों में राजनीतिक दखल चलता रहेगा।
उपनल के आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन में पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के पुनर्वास के लिए रोजगार देना प्राथमिकता है, जिसे पूर्व सैनिक संगठन उठाते रहे हैं। इससे निगम में गैर सैन्य लोगों की भर्तियां पर सवाल खड़ा हो जाता है।
आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन का निगम उल्लंघन सरकारी आदेशों से हो रहा है। सरकार ने निगम में आरक्षण नियमावली और अन्यों की भर्ती करने के लिए शासनादेश जारी किये हैं। वहीं भर्ती के लिए उपनल के अलावा दूसरी जगहों से आउटसोर्सिंग किया जाना भी एक मुद्दा है।
अपनी एजेंसियां हैं तो निजी से भर्ती क्यों
भर्तियों के लिए विवादित उपनल के अलावा पीआरडी और हिल्ट्रान आउटसोर्सिंग करती हैं। तीन एजेंसियां होने के बाद भी सरकारी विभाग प्राइवेट आउटसोर्सिंग एजेंसियों से कर्मचारी ले रहे हैं।
तीन एजेंसियों के बावजूद 20 फीसदी आउटसोर्सिंग प्राइवेट एजेंसियों से हुई है। उपनल के वेतन ढांचे और अन्य लाभ बेहतर होने से पीआरडी और हिल्ट्रान पिछड़ गए हैं, जबकि भर्ती की प्रक्रिया वहां भी उपनल की तरह है।
सरकार की मंशा पर उठे सवाल
- गैर पूर्व सैनिकों के लिए भर्ती के प्रावधान
- गुरिल्लाओं को भी निगम के माध्यम से रखने के आदेश
- अर्द्धसैनिक बलों को भी निगम की भर्तियों में हिस्सेदारी
- प्राइवेट आउटसोर्सिंग एजेंसियों पर कोई रोकटोक नहीं
- पीआरडी और हिल्ट्रान के लिए मानक नहीं बनाए