पर्यटकों को लुभाने के लिए अब उत्तराखंड जर्मन की ओर रुख करने की तैयारी में है। केंद्र सरकार बर्लिन में पांच मार्च से नौ मार्च तक शुरू हो रहे आइटीबी बर्लिन में उत्तराखंड को भी शो केस करने की तैयारी में है।
केदार घाटी को पर्यटकों के मुफीद बनाने के लिए योजना
प्रदेश के पर्यटन सचिव उमाकांत पंवार का कहना है कि केदार घाटी को पर्यटकों के मुफीद बनाने के लिए पूरी योजना तैयार कर ली गई है और जल्द ही इस पर काम शुरू कर लिया जाएगा।
आपदा के बाद प्रदेश के पर्यटन विभाग को केंद्रीय मंत्रालय से करीब 100 करोड़ रुपये लागत की पर्यटन विकास योजनाओं के लिए स्वीकृति मिल चुकी है।
आईटीबी बर्लिन में केंद्र सरकार उत्तराखंड सहित करीब सात राज्यों के पर्यटन स्थानों को शो केस करने की तैयारी में हैं। फाइंड वाट यू सीक अभियान के तहत केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय प्रदेश के 65 से अधिक पर्यटन स्थानों पर फोकस करेगा।
गोल्फ पर्यटन के साथ ही प्राकृतिक सुंदरता और अन्य तरह के पर्यटन के लिए अधिक से अधिक पर्यटकों को लुभाने की कोशिश की जाएगी।
पर्यटन को फिर से स्थापित करने पर फोकस
प्रदेश सरकार ने भी इसके लिए कोशिश शुरू की है। पर्यटन सचिव उमकांत पंवार के मुताबिक प्रदेश सरकार का फोकस केदारघाटी के पर्यटन को फिर से स्थापित करने पर है।
2013-14 में ही केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय से आपदा में ध्वस्त हो गए पर्यटन केंद्रों को फिर से स्थापित करने के लिए करीब 100 करोड़ लागत की योजनाओं को स्वीकृति मिल गई है।
इन योजनाओं का खाका पर्यटन विभाग ने केंद्रीय मंत्रालय को भेजा था। इन योजनाओं पर काम शुरू कर दिया गया है। सचिव के मुताबिक केदारनाथ को वाई फाई से जोड़ा जाएगा ताकि किसी को किसी से संपर्क करने में कोई पेरशानी न हो।
प्रत्येक व्यक्ति का पूरा विवरण रखा जाए
केदारनाथ की ओर जाने वाले पर्यटकों की संख्या को नियमित किया जाए और प्रत्येक व्यक्ति का पूरा विवरण रखा जाए। आपदा में बरबाद हो गए पर्यटक आवास गृहों को फिर से बनाया जा रहा है।
आपदा प्रभावित सभी जिलों के सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लान के लिए 10 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है। प्रदेश का पर्यटन विभाग एक मात्र ऐसा विभाग है जिसे अपने मंत्रालय से पुनर्निर्माण के तहत परियोजनाएं स्वीकृत कराने में सफलता मिली है।
16-17 जून की आपदा के बाद यह संदेश भी गया था कि उत्तराखंड पर्यटन के लिहाज से सुरक्षित नही है। ऐसे में आपदा से प्रभावित जिलों से इतर क्षेत्रों में भी पर्यटन प्रभावित हुआ है।
इस पर्यटन को पटरी पर लाने के लिए यह बताना भी जरूरी है कि प्रदेश में अन्य कई स्थानों पर सुविधाएं मौजूद है।