संस्कृत एक भाषा है, अन्य से नहीं जोड़ा जाना चाहिए : तबस्सुम
संस्कृत एक भाषा है, इसे किसी अन्य चीज से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। यह कहना है कुमाऊं विश्वविद्यालय की प्रोफेसर शालिमा तबस्सुम का। शालिमा मूल रूप से मंगलौर रुड़की की रहने वाली हैं। शालिमा के मुताबिक, वह जहां तक समझती हैं, संस्कृत एक भाषा है। उनके परिजनों ने शुरू से ही उन्हें विषय चयन की छूट दी हुई थी। उनकी संस्कृत के प्रति शुरू से रुचि थी, यही वजह रही कि उन्हें संस्कृत पढ़ते हुए किसी तरह की कोई परेशानी नहीं हुई।
1992 में उन्होंने संस्कृत से एमए किया फिर 1998 में संस्कृत से पीएचडी की। शालिमा बताती हैं कि कुछ लोग दकियानूसी होते हैं, लेकिन उनके यहां इसके लिए कोई जगह नहीं है। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स बताते हैं कि शालिमा को शिक्षा समिति का सदस्य बनाया जाएगा। अपर सचिव कहकशा नसीम की अध्यक्षता में गठित होने वाली यह कमेटी जो सुझाव देगी, उसे मदरसों में शिक्षा की बेहतरी के लिए लागू किया जाएगा।
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मदरसों में शिक्षा की बेहतरी के लिए सरकार एक कमेटी बनाने जा रही हैं, जिसमें कई क्षेत्रों के प्रमुख लोगों को शामिल किया जाएगा। यह कमेटी सरकार को अपने सुझाव देगी। -शादाब शम्स, अध्यक्ष उत्तराखंड वक्फ बोर्ड