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इस पुलिस वाले को अफसर भी ठोकते हैं 'सलाम'

Wed, 02 Jul 2014 05:14 PM IST
जोगेंद्र सिंह मावी/ अमर उजाला, हरिद्वार
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हरिद्वार में रानीपुर की कोतवाली में इंस्पेक्टर पद पर तैनात महेंद्र सिंह नेगी हर लिहाज से एक आम पुलिस वाले दिखते हैं।
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लेकिन उनमें कुछ ऐसी खास बात जरूर है, जिससे उनके अफसर भी उन्हें ‘सर’ कहकर संबोधित करते हैं।

बिना जेबों वाले इंस्पेक्टर के नाम से मशहूर नेगी ईमानदारी और कर्तव्य निष्ठा की अनूठी मिसाल हैं।

यूपी और उत्तराखंड राज्य सरकारों की ओर बेस्ट विवेचक का तमगा मिला है।

इनका इलाका छोड़कर भाग गए बदमाश

इनकी छवि ऐसी कड़क है कि बदमाश इलाका छोड़कर भाग गए, लेकिन 34 साल की सेवा में 75 ट्रांसफर। इससे यह भी साबित होता है कि नेगी बहुत से अफसरों के साथ ‘एडजस्ट’ नहीं कर पाए।

आखिरकार उनकी ईमानदारी की कद्र हुई और वह प्रदेश के पहले पुलिस इंस्पेक्टर हैं जिन्हें महकमे ने रिटायर होने के बाद भी छह महीने का सेवा विस्तार दिया है।

महेंद्र नेगी ऐसे हैं जिसने काजल की कोठरी सरीखे पुलिस महकमे में रहने के बाद भी अपनी वर्दी दागदार होने नहीं दी।

संविधान और कानून की रक्षा का संकल्प

34 साल पहले ट्रेनिंग के बाद तैनाती से पहले संविधान और कानून की रक्षा का संकल्प लिया। यही ताउम्र उनका प्रेरणास्रोत बना रहा।

वैसे तो स्वभाव के संकोची नेगी अपने बारे में बोलने से हिचकते हैं लेकिन महकमे के लोग ही कहते हैं कि नेगी ने जिंदगी में कभी रिश्वत नहीं ली।

अपनी धुन के पक्के नेगी ने वर्दी में कभी जेब नहीं सिलाई। नेगी का काम हमेशा सिर चढ़कर बोला। रिश्वत न लेने के सवाल पर वह कहते हैं कि सरकार से इतना तो मिलता है कि उससे खर्चा चल जाता है और क्या चाहिए।

चर्चित मामलों का खुलासा नेगी के नाम

नेगी की साख ऐसे अफसर की रही कि उनकी तैनाती की सूचना पाकर इलाके के अपराधियों ने या तो मैदान छोड़ दिया अथवा अपराध करना बंद कर दिया।

कई खतरनाक मुजरिमों को नेगी ने जेल की सलाखों के भीतर पहुंचाया। देहरादून, गाजियाबाद के बलात्कार और हत्या के ब्लाइंड मर्डर की गुत्थी सुलझाई और आरोपियों को उम्रकैद की सजा हुई।

इसके अलावा उन्होंने वर्ष 1999 में बागपत के बहुचर्चित इंस्पेक्टर शैलेंद्र सिंह तोमर के मर्डर के मामले को सुलझाया। महकमा नेगी को बेस्ट विवेचक मानता है। अक्सर पुलिस अफसर उलझे मामलों में उनकी सलाह लेते हैं।
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यह है प्रोफाइल

पिता का नाम - मोती सिंह
जन्म स्थान- अल्मोड़ा जनपद के गांव कमान, थाना भितिया सैण
शिक्षा - एमए
1980 में पुलिस में भर्ती
34 की सेवा में 75 तबादले
यूपी पुलिस की फुटबॉल की टीम के खिलाड़ी भी रहे

विशेष सम्मान
राष्ट्रपति सेवा मेडल वर्ष 2008
बेस्ट विवेचक का अवार्ड यूपी गवर्नर से 2004 में
विशेष सेवा सम्मान उत्तराखंड गर्वनर से वर्ष 2008 में
विशेष सेवा सम्मान डीजीपी डीजीपी कंचन चौधरी भट्टाचार्य से
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