उत्तराखंड के चमोली जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में दुर्लभ हिम तेंदुए (स्नो लैपर्ड) का कुनबा साल-दर-साल बढ़ रहा है। नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन को इस वर्ष चीन सीमा पर स्थित हिमालयी क्षेत्र सुमना, मलारी, फूलों की घाटी और नीती क्षेत्रों में छह हिम तेंदुए विचरण करते दिखे।
गत वर्षों तक तीन हिम तेंदुए ही सीसीटीवी कैमरों में कैद होते थे। पार्क प्रशासन ने हिम तेंदुओं की बढ़ती तादाद पर खुशी जताई है।
वर्षभर हिमालय की गोद में विचरण करने वाला हिम तेंदुआ नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन के सीसीटीवी कैमरों में अलग-अलग स्थानों पर दिखाई दे रहा है। इससे पार्क प्रशासन ने हिम तेंदुओं की संख्या बढ़ने का अंदाजा लगाया है।
नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क और केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग ने हिम तेंदुओं की साइट ढूंढने के लिए लंबी दूरी की गश्त बढ़ा दी है। गत वर्ष केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के ऊखीमठ रेंज में भी वन कर्मियों को स्नो तेंदुए के पद चिन्ह मिले थे।
1985 में पहली बार देखा गया हिम तेंदुआ
चमोली जिले की उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सबसे पहले वर्ष 1985 में हिम तेंदुआ देखा गया था। इसी दौरान सौखर्क में वनस्पतियों पर रिसर्च कर रहे एक विदेशी छात्र ने भी हिम तेंदुआ देखा था।
नंदा देवी बायोस्फियर रिजर्व द्वारा वर्ष 2004 में की गई स्तनधारी प्रजातियों की गणना में अभी तक हिमालय क्षेत्र में कुल 4 से 5 हिम तेंदुओं का अप्रत्यक्ष प्रमाण मिला था, लेकिन अब कैमरों से मिल रहे हिम तेंदुओं के चित्रों से पार्क प्रबंधन को इनके निरंतर बढ़ने की उम्मीद है।
हिमाच्छादित क्षेत्रों में ही रहता है हिम तेंदुआ
करीब 3 फीट 3 इंच तक ऊंचाई वाले हिम तेंदुए 3500 मीटर उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ही रहते हैं। यह भरड़, कस्तूरा मृग, थार जैसे वन्य जीवों के शिकार के लिए निचले क्षेत्रो में आते हैं। इसके संपूर्ण बदन पर सफेद और काले धब्बे होते हैं।
बोले अधिकारी
हिम तेंदुओं का कुनबा निसंदेह बढ़ रहा है। मलारी क्षेत्र में हिम तेंदुए के साथ ही गुलदार भी बड़ी संख्या में देखे गए हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में लंबी दूरी की गश्त भी लगाई गई है।
-राजीव धीमान, डीएफओ, नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क, जोशीमठ (चमोली)।