फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अब गढ़वाली भाषा में पढ़ें रामायण

Mon, 31 Mar 2014 10:59 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
मांगल, चौंफला, लोकगीत, जागर की मिठास भरी धुनें लोगों को मंत्रमुग्ध करने के साथ झूमने को मजबूर कर देती हैं।
विज्ञापन


पढ़ें, जनता के बीच एनडी तिवारी ने किया ऐलान

मगर पहली बार लिखी गई गढ़वाली रामायण में लोकगीत, संगीत का भी समावेश किया गया है। गढ़वाल रामायण में लोक संगीत से जुड़ी 151 तर्जें शामिल की गई हैं।

मंदिरों, धार्मिक अनुष्ठानों में कथा वाचन, रामायण पाठ अक्सर होता रहता है, वहीं अक्तूबर-नवंबर में ग्रामीण अंचलों में रामलीला का भी आयोजन होता है। जिसमें संस्कृत और अवधी का उपयोग होता है।

पढ़ें, रिश्तेदार संग मिल एक बाप ने किया बेटी का रेप

मगर अब गढ़वाली भाषा में भी रामलीला का मंचन, रामकथा वाचन, रामायण पाठ का आयोजन हो सकेगा। यह सब संभव होगा डील निवासी श्याम प्रसाद ध्यानी की गढ़वाली रामायण से जिसका रविवार को विमोचन किया गया।
विज्ञापन


मूल रूप से भोपाटी निवासी श्याम प्रसाद ने बताया कि यह गढ़वाल का पहला महाकाव्य है, जिसे उत्तराखंड भाषा संस्थान ने भी उत्कृष्ट रचना घोषित किया है। करीब 900 पेज की किताब में सात खंडों में सचित्र वर्णन के साथ रचना लिखी गई है।

पढ़ें, उत्तराखंड के यह पॉलीटेक्निक कॉलेज होंगे 'बंद'

इसमें मांगल, चौपाई, दोहा, सोरठा, चौंफला, लोकगीत, जागर, लोक गायकों के संगीत पर आधारित 151 गढ़वाली तर्जें हैं। यह रंगमंचीय रामलीला, राम कथा वाचन, रामायण पाठ, व्यास पीठ, शिक्षा आदि के लिए लाभदायक होगी।
विज्ञापन


जूनियर हाईस्कूल नांगल में अध्यापक पद से रिटायर ध्यानी ने बताया कि बीते 20 साल पहले किताब लिखनी शुरू की थी और 2012 में पूरी किताब लिखी। मगर आर्थिक कमी से प्रकाशन दो साल रुका रहा और अब प्रकाशन हो सका है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें