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Ram Mandir: आंदोलन के लिए छोड़ दिया था कारसेवक विजय स्नेही ने अपना घर, जेल में मिली थी मां के निधन की खबर

Fri, 12 Jan 2024 06:37 PM IST
रेनू सकलानी वत्सल गुप्ता, संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून

सार

देहरादून के विजय स्नेही श्रीराम कार सेवा समिति के नगर संयोजक रहे हैं। बोले कि अपनी आंखों के सामने राम मंदिर बनते देख आज खुशी का ठिकाना नहीं है। 
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Ram Mandir - फोटो : Social Media
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विस्तार
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श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के समय देहरादून के प्रमुख कारसेवकों में विजय स्नेही का भी नाम है। उस वक्त उन्हें घर तो छोड़ना ही पड़ा, जेल की हवा भी खानी पड़ी। जब वह जेल में थे तो उन्हें अपनी मां की मृत्यु का समाचार मिला। वह मां की अंतिम यात्रा में शामिल नहीं हो सके थे इसका उन्हें जितना मलाल है उतना ही राममंदिर बनने से आनंद भी है।

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स्नेही वर्ष 1990 की यादें ताजा कर रहे हैं। उस वक्त राम जन्मभूमि आंदोलन चरम पर था। स्नेही देहरादून के उन चुनिंदा लोगों में शामिल रहे जिन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को न सिर्फ अपनी आंखों से देखा बल्कि अपने आराध्य को स्थान दिलाने की उस जंग में उन्हें जेल भी जाना पड़ा। स्नेही को श्रीराम कार सेवा समिति के दून नगर संयोजक बनाया गया था। आंदोलन के समय वह नौ दिन तक टिहरी जेल में बंद रहे थे।

देहरादून में उन्होंने अन्य लोगों के साथ मिलकर सत्याग्रह किया। झंडेजी के आसपास सत्याग्रह करते हुए अपनी गिरफ्तारी दी थी। बताया कि तब पुलिस कोतवाली लेकर आई। वहां से रेसकोर्स और फिर गाड़ी में बिठाकर टिहरी जेल लेकर गई थी।

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आंदोलन के लिए छोड़ दिया था घर
विजय स्नेही ने बताया कि राम जन्मभूमि के आंदोलन के लिए उन्होंने अपना घर छोड़ दिया था। इसके बाद वह पार्क रोड पर रह रहे थे। वहीं रहकर उन्होंने आंदोलन में भाग लिया। बताया कि इसके बाद जुलूस निकालने के लिए सैकड़ों रामभक्त एकत्र हुए। लेकिन, उन्हें बड़़ी संख्या में पुलिसबल रोकने का प्रयास करता रहा। इसके बाद रामजी की तस्वीर को कंधे पर रखकर सैकड़ों रामभक्त निकल पड़े। रामभक्तों की संख्या काफी होने के चलते पुलिस जुलूस को नहीं रोक सकी।

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आंदोलन के दौरान वेश बदलकर घूमते रहे
विजय स्नेही बताते हैं कि राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान जब वह दून में आंदोलन कर रहे थे तब पुलिस घर आकर परिवारजनों को परेशान करती थी। तब पुलिस से बचने के लिए वह वेश बदलकर शहर में घूमते रहते थे।
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