वेदवती ने रावण का आतिथ्य सत्कार किया, लेकिन रावण ने वेदवती को छूने की कोशिश की थी। इसके बाद वेदवती ने रावण को श्राप दिया था कि त्रैतायुग में वही उसके अंत का कारण बनेगी और उसने वहीं शरीर त्याग दिया था।
रामावतार में जब राम, लक्ष्मण और सीता 14 वर्ष के लिए वन में थे, तो इस दौरान राम ने सीता को वेदवती के श्राप की बात बताई और सीता को अग्नि में समर्पित कर दिया। सीता के रूप में वेदवती प्रकट हुई। तब सीता के रूप में रावण ने वेदवती का हरण किया था। जब रावण का वध हो जाता है, तब सीता की अग्नि परीक्षा होती है। इसमें वेदवती अग्नि को समर्पित हो जाती है और सीता अग्नि से बाहर आती हैं।
भुवन चंद्र उनियाल बताते हैं कि हनुमान संजीवनी बूटी को लेने के लिए चमोली जनपद के नीती घाटी में स्थित द्रोणागिरी पर्वत पर पहुंचे थे। वे यहां संजीवनी बूटी को पहचान नहीं पाए और द्रोणागिरी पर्वत का एक हिस्सा उठाकर ले गए थे। आज भी यहां पर्वत का टूटा हिस्सा साफ नजर आता है।