दीये तैयार करने के लिए प्रशासन कर रहा प्रोत्साहित
दीपोत्सव के लिए स्थानीय प्रशासन भी कुम्हारों को अधिक से अधिक दीये बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। गंगा शरण प्रजापति बताते हैं प्रशासन की टीम बीते दिनों उनके घर आई। प्रशासन को अपनी पीड़ा भी बताई। गंगा शरण बताते हैं, सभी कुम्हार बिंदाल पुल के पास सड़क किनारे दीयों और मिट्टी के बर्तन बेचते थे। स्मार्ट सिटी के कार्य होने से उनको हटा दिया। अब घर से ही बिक्री करते हैं। प्रशासन की ओर से दीयों की बिक्री के लिए उपयुक्त जगह उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।
ये भी पढ़ें...काल बना नया वाहन: हंसी-खुशी जा रहे थे अफसर...पलक झपकते ही सड़क पर दिखे खून से लथपथ, हादसे का वीडियो वायरल
मिट्टी हो गई महंगी और मोटर से घूमने लगी चाक
कुम्हार दीये बनाने के लिए मेहूंवाला से मिट्टी मंगवाते हैं। एक पिकअप मिट्टी का रेट दो हजार रुपये से बढ़कर चार हजार पहुंच गया है। भट्टी जलाने के लिए बुरादा और लकड़ी भी महंगी हो गई है। लेकिन दीपोत्सव के लिए कुम्हारों ने दीयों के रेट नहीं बढ़ाए हैं। फुटकर बाजार में दीये 20 रुपये के 25 और 80 रुपये के 100 बिक रहे हैं। जबकि थोक में आर्डर पर 20 रुपये के 30 और 60 रुपये के 100 दीये बिक रहे हैं। चाक अब हाथ के बजाय बिजली की मोटर से घूमती है।