कोरोना काल में पड़ रहे रक्षाबंधन त्योहार के लिए बहनों ने इस बार खास तैयारियां की हैं। भाई-बहन के प्रेम के प्रतीक रक्षाबंधन पर इस बार भाइयों की कलाई पर कुमाऊं की लोककला ऐपण वाली राखियां सजेंगी।
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चंपावत जिला मुख्यालय के पूल्ड हाउस निवासी प्रांजलि लोहनी और बढ़ावे निवासी ममता जोशी सोशल मीडिया के माध्यम से ऐपण विधा को बढ़ावा दे रहीं हैं। वह इस बार भी ऐपण कला वाली सस्ती और मनमोहक राखियां तैयार कर रही हैं। प्रांजलि और ममता ऐपण कला के क्षेत्र में अच्छा खासा नाम अर्जित कर चुकी हैं। उत्तराखंड की लोककला ऐपण अब भाई-बहन के प्यार के प्रतीक रक्षाबंधन के साथ जुड़कर अपना एक अलग इतिहास बना रही है। प्रांजलि और ममता का कहना है जब हर बहन अपने भाई की कलाई पर लोककला ऐपण वाली राखी बांधेगी तो कुमाऊं की यह लोककला और ज्यादा समृद्ध होगी।
पिछली बार जल्दी बिक गई थी ममता की सभी राखियां
ममता का कहना है कि ऐपण वर्ल्ड संस्था के बैनर तले उन्होंने पिछले साल भी ऐपण वाली राखियां बनाईं थीं। इनकी लोगों के बीच अत्यधिक मांग रही। उनका राखियों का सारा स्टॉक जल्द खत्म हो गया था और अंतिम समय में कई लोगों को राखियां नहीं मिल सकीं थीं। इस बार वह बड़ी मात्रा में राखियां तैयार कर रहीं हैं। इसके लिए सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों के ऐपण वर्ल्ड ऑफिशियल पेज पर ऑर्डर बुक किए जा रहे हैं। (संवाद)
चर्चाओं में रहे हैं प्रांजलि के बनाए गंगा दशहरा द्वार पत्र
चंपावत जिला मुख्यालय के पूल्ड हाउस निवासी प्रांजलि लोहनी इससे पूर्व अपने हाथों से गंगा दशहरा द्वार पत्र बनाने से काफी चर्चाओं में रहीं हैं। इस बार उनका लक्ष्य ऐपण की राखियां तैयार कर इस लोककला को और समृद्ध करना है।