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बाजार में हमारे भी खरीददार थे... : राजेंद्र सिंह भंडारी 

Sun, 27 Nov 2016 11:56 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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rajendra singh bhandari - फोटो : amar ujala
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उत्तराखंड के पहले ऐसे मंत्री जो दो बार विधायक चुने गए और दोनों ही बार अलग-अलग सरकारों में मंत्री बनाए गए हरीश रावत मंत्रिमंडल में कृषि मंत्री राजेंद्र सिंह भंडारी छात्र राजनीति से सक्रिय राजनीति में आए। 
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दो बार वे गोपेश्वर महाविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष रहे। भाजपा नेता सतपाल महाराज के  करीबी लोगों में शामिल होने की वजह से अक्सर उनके भाजपा में जाने की खबरें उड़ती हैं। हालांकि वे पाला बदलने की चर्चा को कोरी अफवाह बताते हैं।

पहले सतपाल महाराज, फिर पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी और अब मुख्यमंत्री हरीश रावत के करीबी माने जाने वाले कृषि मंत्री राजेंद्र सिंह भंडारी पर पहाड़ के बाहुबली नेता होने का ठप्पा भी है। इस छवि को वे सिरे से नकारते हुए कहते हैं कि वे अपनी मर्जी के मालिक हैं, जो फैसला करते हैं खुद करते हैं। अमर उजाला के वरिष्ठ संवाददाता बिशन सिंह बोरा ने कृषि मंत्री पर तीखे सवालों के तमाम तीर छोड़े। उन्होंने अपना बचाव कैसे किया आप भी जानिए...
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आपकी पहचान पहाड़ के बाहुबली नेता के तौर पर बताई जाती है ?
नहीं ऐसी कोई बात नहीं है, जब कभी कोई विवाद हुआ भी तो वह परिस्थितिजन्य रहा। मैंने कभी भी बाहुबली जैसा कोई काम नहीं किया। मैं पहाड़ के किसान का बेटा हूं और मैंने हमेशा संघर्ष करना सीखा, मैं परिणामों की परवाह नहीं करता। 

क्या मंत्री का पद आपको सौदेबाजी से मिला है ?
करार और समझौते का कोई सवाल ही नहीं है। जिस दिन मंत्री पद की शपथ ली उस दिन सुबह आठ बजे बताया गया कि आपको मंत्रिमंडल में शामिल किया जा रहा है, इससे पहले मैं इस बात को लेकर बेचैन था कि इस बार मंत्रिमंडल में नंबर आ रहा है या नहीं। 

आप सतपाल महाराज के करीबी रहे हैं, लेकिन उनसे रिश्तों में खटास कैसे आ गई ?
भाजपा के सतपाल महाराज में विश्वास नहीं, मैं कांग्रेस के सिद्धांत को मानता हूं। महाराज भाजपा नेता हैं और मैं कांग्रेस का सिपाही हूं।   

चर्चा है कि आप सतपाल महराज के सबसे करीबी लोगों के संपर्क में हैं, चुनाव से पहले पाला बदलने की तैयारी तो नहीं ?
जब 10 लोग कांग्रेस छोड़कर गए, बाजार में हमारे भी खरीददार आए, लेकिन हमने अपना ईमान नहीं बेचा। चर्चाओं को कोई रोक नहीं सकता। यह मात्र अफवाह है। कुछ लोग हमारी लोकप्रियता से घबराकर हमें बदनाम करने के लिए यह सब कह रहे हैं। 

लोगों का आरोप है कि आप केवल पोखरी विकासखंड के मंत्री बनकर रह गए हैं ?
मैं मंत्री बनने के बाद मात्र एक बार दो दिनों के लिए पोखरी गया। पोखरी मेरी जन्म भूमि है, यदि वहां जाना अपराध है तो लोग बताएं। 

सरकार ने अपने घोषणा पत्र में कई घोषणाएं कीं, विकासखंड स्तर पर कृषि विद्यालयों की स्थापना एवं अन्य घोषणाओं पर अमल नहीं हुआ ?
सरकार की अन्य घोषणाओं का क्या हुआ मैं नहीं जानता, लेकिन मंत्री बनने के बाद मेरी 90 फीसदी घोषणाएं पूरी हुई हैं। 

करोड़ों रुपये के ढैंचा बीज घोटाले में त्रिपाठी आयोग ने सरकार को जो रिपोर्ट दी है उसे सरकार दबाए हुए है, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के बजाए उनके मामले निपटाए जा रहे हैं ?
जांच में जो दोषी पाया गया होगा उसके खिलाफ निश्चित रूप से कार्रवाई होगी, रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी। कोई बख्शा नहीं जाएगा।  

आप और आपकी पत्नी इस बार किस सीट से दावेदारी कर रहे हैं, चर्चा है कि आपकी पत्नी केदारनाथ से दावेदारी कर रही हैं ?
पार्टी का सच्चा सिपाही हूं, पार्टी जहां से चुनाव लड़ने को कहेगी तो चुनाव लड़ेंगे यदि संगठन में जिम्मेदारी दी जाएगी तो वह भी निभाएंगे। 

आप गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने के पक्षधर रहे हैं, लेकिन विधान सभा सत्र के दौरान इस मसले पर आप चुप्पी साधे रहे। क्या पहले ही कोई समझौता हो गया था ? नहीं..नहीं.. ऐसी कोई बात नहीं है। मैं आज भी गैरसेण को स्थाई राजधानी बनाने के पक्ष में हूं। बोला इसलिए नहीं कि  राजधानी बनने से पहले वहां बुनियादी सुविधाएं मसलन रहने, खाने की तो व्यवस्था हो।
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