उत्तराखंड सरकार की निजी एजेंसियों पर मेहरबानी और अपनों से बेरुखी की नीति के चलते जीएमवीएन की वुड वूल फैक्ट्री यूनिट बंद होने की कगार पर पहुंच गई है।
उत्तर प्रदेश के जमाने में कभी भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) समेत तमाम सरकारी विभागों को फर्नीचर आपूर्ति करने वाली निगम की यह यूनिट घाटे में चल रही है। स्थिति यह है कि यूनिट को अब निगमकर्मियों का वेतन निकालना भी मुश्किल हो गया है।
गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) ने 70 के दशक में मुनिकीरेती में पर्वत वुड वूल फैक्ट्री स्थापित की थी। तब सरकारी स्कूलों के अलावा विभिन्न विभागों और सरकारी उपक्रमों में इस यूनिट से बड़ी मात्रा में मेज, कुर्सी, अलमारी आदि फर्नीचर की आपूर्ति होती थी।
बीएचईएल विभिन्न सामानों की पैकेजिंग में काम आने वाली लकड़ी खरीद का बड़ा ग्राहक होता था। नतीजतन फैक्ट्री का सालाना टर्न ओवर सात करोड़ तक पहुंचा। कर्मियों के वेतन और अन्य खर्चों के बाद 75 लाख रुपये सालाना मुनाफा भी फैक्ट्री ने निगम को दिया। लेकिन राज्य बनने के बाद सरकार की बेरुखी से फैक्ट्री घाटे में जाने लगी।
फैक्ट्री को सरकारी विभागों से अब फर्नीचर के आर्डर मिलने बंद हो गए हैं। वित्तीय वर्ष 2014-15 से फैक्ट्री लगभग 50 लाख रुपये सालाना घाटे में चल रही है।
‘शासन से अनुरोध किया है कि सरकारी विभागों को निर्देशित किया जाए कि निगम की फैक्ट्री से ही फर्नीचर की खरीद की जाय। शिक्षा महानिदेशक से भी इस बारे में पत्र व्यवहार किया गया है। निगम प्रबंधन का प्रयास है कि फैक्ट्री को घाटे से उबारकर दोबारा फायदे में पहुंचाया जाए।’
- एमएस बर्निया, जीएम (इंडस्ट्री) जीएमवीएन