कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मिलने के लिए पहुंचे पूर्व सैनिकों को वन रैंक वन पेंशन की तरह लंबा इंतजार करना पड़ा। रैली निपटाने के बाद राहुल सीधे होटल अकेता पहुंचे जहां पहले से मौजूद पूर्व सैनिकों से उन्होंने मुलाकात की।
पूर्व सैनिकों से मुलाकात कर राहुल ने उनके वन रैंक वन पेंशन से संबंधित शंकाओं को सुना। पूर्व सैनिकों ने सैनिक फार्म पत्थरचट्टा की भूमि का मुद्दा भी उठाया।
पेंशन पर ली सैनिकों की राय
कांग्रेस के पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ के अधीन पूर्व सैनिकों का एक दल शाम सवा चार बजे राहुल गांधी से मिलने पहुंचे। पूर्व सैनिकों से मिलने के पीछे मकसद उनकी समस्याओं को सुनने के साथ लागू वन रैंक वन पेंशन पर राय लेना भी था।
राहुल ने पूर्व सैनिकों से वन रैंक वन पेंशन को लेकर प्रतिक्रिया भी जानी। देहरादून एक्ससर्विस लीग के ब्रिगेडियर केजी बहल बताया कि उन्होंने वन रैंक वन पेंशन लागू करने से पहले छठे वेतन आयोग में पैदा हुई पेंशन विसंगतियों को दूर किया जाए।
लीग ने सैन्य अधिकारियों के 1986 से लंबित रैंक पे का मुद्दा भी उठाया, जिसपर 2011 में सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी पूर्व सैनिकों के पक्ष में आ चुका है।
राहुल के सामने रखी मांग
पूर्व सैनिकों ने राहुल के सामने वन रैंक वन पेंशन पर यूपीए की सैद्धांतिक सहमति को लेकर अपने सवाल रखे। पूर्व सैनिकों का कहना है कि सरकार एक जनवरी 2006 से इसे लागू करे।
पूर्वसैनिक परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गंगा सिंह रावत ने कहा कि लंबे समय से वन रैंक वन पेंशन का इंतजार कर रहे सैनिकों की मांग यूपीए सरकार ने पूरी की है। पूर्व सैनिकों में इससे उत्साह है।
उत्तराखंड पूर्व सैनिक एवं अर्द्धसैनिक संगठन के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल (रि) गंगा सिंह रावत ने तीन मांगों का पत्र राहुल को सौंपा।
सैनिक फार्म पर सरकार को घेरा
राहुल के सामने कर्नल एचएस बिष्ट ने सैनिक फार्म पत्थरचट्टा का मुद्दा उठाया। कर्नल बिष्ट ने सैनिक फार्म की भूमि अन्यत्र हस्तांतरित करने को लेकर पूर्व सैनिकों में बनी शंका जाहिर की। उन्होंने राहुल से इस मसले में हस्तक्षेप कर राज्य सरकार को निर्देश जारी करने की मांग रखी।