सैन्य बहुल प्रदेशों में कांग्रेस वन रैंक वन पेंशन को भुनाने में एक व्यापक अभियान चला रही है। पार्टी इसका श्रेय राहुल गांधी को दे रही है।
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फैसले के बाद राहुल की उत्तराखंड में पहली रैली करवाने का मकसद यह भी है कि ठीक दो माह पहले दून से ही नरेंद्र मोदी फौजियों से कई वायदे कर गए थे।
अब रविवार को राहुल उसी मैदान से वन रैंक वन पेंशन का कार्ड खेलेंगे, जिसके बाद 24 फरवरी को पंजाब के पूर्व सैनिकों से मिलेंगे।
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वन रैंक वन पेंशन का कार्ड खेलकर कांग्रेस का टारगेट देश के 30 लाख पूर्व सैनिक और उनके परिवार हैं। लोकसभा चुनावों को देखते हुए फैसले को भुनाने के लिए उत्तराखंड से शुरूआत सबसे अनुकूल है।
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उत्तराखंड देश का एकमात्र राज्य है जिसकी 10 फीसदी आबादी सीधे पूर्व सैनिकों से जुड़ी है। यही कारण है कि 15 दिसंबर को भाजपा नेता नरेंद्र मोदी ने देहरादून के परेड ग्राउंड में फौजियों के पुनर्रोजगार का मर्म को छुआ तो राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने भी वन रैंक वन पेंशन को उठाया।
ठीक दो माह बाद 17 फरवरी को यूपीए सरकार ने वन रैंक वन पेंशन के लिए बजट प्रावधान कर मुद्दे को भाजपा से छीनने की कोशिश की है।
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अब कांग्रेस श्रेय लेने के लिए उसी परेड मैदान से वन रैंक वन पेंशन का अपना अभियान शुरू करेगी, जहां से मोदी ने फौजियों की वाहवाही हासिल की थी।
राहुल के दौरे में पूर्व सैनिकों से मुलाकात को विशेष तरजीह दी जा रही है। पूर्व सैनिक संगठनों सहित पहाड़ी जनपदों से पूर्व सैनिकों को रैली के लिए बुलाया जा रहा है।