जौनसार बावर परिवर्तन यात्रा में शामिल दलितों को गबेला के कुकुर्शी मंदिर में प्रवेश से रोकने पर तीन दिनों तक हाईवोल्टेज ड्रामा चलने के बाद चौथे दिन गांव में शांति पसर गई।
कुकुर्शी मंदिर परिसर में भी सन्नाटा रहा। जिलाधिकारी रविनाथ रमन ने बताया कि दोनों पक्षों में समझौता हो गया है। किसी को मंदिर में दलित समुदाय के प्रवेश पर कोई आपत्ति नहीं है। उधर, मंदिर में प्रवेश से रोकने के विरोध में भूख हड़ताल कर रहे जौनसार बावर परिवर्तन यात्रा से जुड़े सात लोग बृहस्पतिवार को दून पहुंचकर धरने पर बैठ गए। इन लोगों ने पुलिस पर हिरासत में प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है।
पुलिस हिरासत से छूटने के बाद बृहस्पतिवार सुबह जौनसार बावर परिवर्तन यात्रा में शामिल सात लोग दून के गांधी पार्क पहुंच गए। उन्होंने भूख हड़ताल जारी रखते हुए धरना शुरू कर दिया। यात्रा के संरक्षक दौलत कुंवर ने कहा कि पुलिस ने गबेला में उनके आयोजन स्थल से सामान भी गायब कर दिया है। उनके साथियों के मोबाइल, पर्स और रुपये आदि भी ले गए हैं।
पुलिस और प्रशासन दबंगों के इशारे पर हमारे उपर जुल्म ढा रहा है। रात करीब दस बजे दून पुलिस गांधी पार्क पहुंची और वहां धरना प्रदर्शन प्रतिबंधित होने की बात कही। इसके बाद रात को ये लोग वहां से पुराना रायपुर बस स्टैंड स्थित धरनास्थल जाकर धरने पर बैठ गए।
रात को एक प्रदर्शनकारी राजू की हालत बिगड़ने पर उसे खाना खिलाया गया। भूख हड़ताल पर दौलत कुंवर, सरस्वती कुंवर, बारू निराला, पूनम भारती, श्याम सिंह भारती और केसर सिंह आदि शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि तीन दिन पूर्व दलितों के उत्थान के लिए निकाली गई जौनसार बावर परिवर्तन यात्रा में शामिल दलितों को देव मालियों पर अवतरित देवता ने मंदिर में प्रवेश करने से रोक दिया।
इसका विरोध करते हुए यात्रा में शामिल लोग संरक्षक दौलत कुंवर के नेतृत्व में मंदिर परिसर में भूख हड़ताल शुरू कर दिया था। लोगों ने मंदिर में प्रवेश नहीं मिलने पर धर्म परिवर्तन की भी चेतावनी दी थी।
इसके बाद बुधवार को ग्रामीणों की तहरीर पर शांति भंग के आरोप में राजस्व पुलिस ने धरना दे रहे करीब 12 लोगों को हिरासत में ले लिया था। तीन दिनों तक गांव में खूब गहमा-गहमी रही और मामले ने तूल पकड़ लिया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गांव में पुलिस फोर्स और पीएससी भी तैनात करनी पड़ी थी।
हमें कभी मंदिर प्रवेश से नहीं रोका गया...
गबेला गांव में रहने वाले और दलित वर्ग से ताल्लुक रखने वाले पूर्व प्रधान घेंघू राम और तुलसी राम का कहना है कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी गांव में बिता दी, लेकिन कभी भी उनके साथ भेदभाव नहीं किया गया। मंदिर में प्रवेश पर भी किसी प्रकार की रोक नहीं है।
गांव वाले हर सुख-दुख में उनके साथ रहते हैं। शायद यही कारण है कि वे गांव के प्रधान भी चुने जा चुके हैं। गांव में रहने वाले कई दलित परिवार भी घेंघू राम और तुलसीदास की इन बातों से सहमत हैं। मालूम हो की मंदिर प्रवेश मामले से सुर्खियों में रहे गबेला गांव की आधी आबादी दलितों की ही है।
लोगों का कहना है कि राजनीति चमकाने के लिए गांव की छवि को धूमिल करने की कोशिश की गई। पूर्व प्रधान का कहना है कि बाहर से आने वाले चंद लोगों ने ही हंगामा बरपाया।
कोई भी करे दर्शन हमें नहीं आपत्ति
देव मालियों ने बृहस्पतिवार को एसडीएम को भेजे ज्ञापन में कहा कि देवता का मंदिर सबके लिए है। ऐसे में देव मालियों को किसी के भी मंदिर प्रवेश पर कोई आपत्ति नहीं है। कुछ लोगों ने बेवजह मामले को राजनीतिक ढंग देने की कोशिश की है।
कहा वह शीघ्र ही सभी खत के दलितों की बैठक भी बुलाएंगे। बैठक में इस बात को सार्वजनिक रूप से रखा जाएगा। ज्ञापन सौंपने वालों में कुकर्शी और महासू देवता के देव माली जितेंद्र शर्मा, खजान सिंह, दिनेश शर्मा, टीकारामा शर्मा, किरन शर्मा आदि शामिल रहे।