अल्मोड़ा में एसएसजे परिसर के निकट स्थित ऐतिहासिक ओकले हाउस के परिसर में देवदार के पेड़ के नीचे 1898 में स्वामी विवेकानंद ने आयरलैंड की मार्गेट एलिजाबेथ को दीक्षा दी थी और उन्हें सिस्टर निवेदिता नाम दिया।
स्वामी विवेकानंद की यादों से जुड़े इस स्थल को पर्यटन मानचित्र में शामिल करने के लिए आज तक की सरकारों ने कुछ नहीं किया।
इस भवन के पास एक बोर्ड तक नहीं लगा है, जबकि अल्मोड़ा में अक्तूबर-नवंबर में पश्चिम बंगाल से बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। ओकले हाउस में 1866 से कुछ साल तक तत्कालीन कलेक्टर जॉन वैकेट रहते थे, बाद में उन्होंने अपना निवास बदल दिया और 1969 में इस भवन को नीलाम कर दिया गया।
स्वामी विवेकानंद के शिष्य रहे स्व. लाला बद्री साह के पोते गिरीश साह बताते हैं कि उनके परदादा लाला स्व. हरि साह ठुलघरिया ने यह भवन तब साढ़े छह सौ रुपये में खरीदा। 1898 में जब स्वामी विवेकानंद अल्मोड़ा आए तो उनके साथ पहुंचे मेकलॉड, सिस्टर निवेदिता, गुडविन, स्वामी सदानंद इसी भवन में ठहरे थे।
जबकि स्वामी विवेकानंद पास में स्थित थॉमसन हाउस में ठहरे थे। स्वामी जी सुबह शाम ओकले हाउस में आकर अपने इन शिष्यों से चर्चा किया करते थे। उनके साथ मार्गेट एलिजाबेथ नोबुल भी आई थीं। एक दिन वह ओकले हाउस परिसर स्थित देवदार के पेड़ के नीचे बैठी थीं तो स्वामी विवेकानंद को देखकर उनके आंख से आंसू निकल पड़े।
स्वामी विवेकानंद ने उनके सिर पर हाथ रखा और उन्हें दीक्षा दी। इसके बाद उनमें अद्भुत परिवर्तन आया और वह सदा के लिए भारत की हो गईं।
कौन थी सिस्टर निवेदिता
मार्गेट एलिजाबेथ नोबुल (सिस्टर निवेदिता) का जन्म 28 अक्तूबर 1867 को आयरलैंड में हुआ। उनके जीवन में 1895 में तब मोड़ आया जब उनकी मुलाकात लंदन में स्वामी विवेकानंद से हुई।
वह उनके व्यक्तित्व से इतनी आकर्षित हुई कि 1898 में उनसे मिलने भारत चली आईं। कुछ समय स्वामी विवेकानंद के साथ भारत भ्रमण करने के बाद वह कोलकाता में बस गईं। उन्होंने वहां लड़कियों के लिए स्कूल खोला और पूरा जीवन स्त्री शिक्षा के लिए समर्पित कर दिया।
पर्यटन के लिए वरदान हो सकते हैं स्वामी विवेकानंद से जुड़े स्थल
अल्मोड़ा में स्वामी विवेकानंद से जुड़े कई स्थल हैं, जिन्हें विकसित करके पर्यटन विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है। ओकले हाउस, थॉमसन हाउस, खजांची मोहल्ला, करबला, देवलधार सहित कई स्थलों से स्वामी विवेकानंद की यादें जुड़ी हैं।
इन स्थलों पर उनके स्मारक और पार्क आदि बनाकर पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश बिष्ट कहते हैं कि अगर इन स्थलों को विकसित किया जाए तो अल्मोड़ा में पर्यटन व्यवसाय काफी बढ़ सकता है।
सरकारी उपेक्षा से खिन्न हैं गिरीश साह
ओकले हाउस अब गिरीश साह का घर भी है और कुछ हिस्से को वह गेस्ट हाउस के रूप में भी चला रहे हैं। सरकारी उपेक्षा से खिन्न श्री साह बताते हैं कि वह कई दशकों से इसके लिए सरकारों से आग्रह करते रहे, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
गिरीश साह ने हाल ही में अपने एक मित्र के सहयोग से ओकले हाउस के प्रांगण में सिस्टर निवेदिता की मूर्ति स्थापित की है। हिमालयन हेरिटेज संस्था के कौशल सक्सेना ने बताया कि उन्होंने ओकले हाउस के बारे में प्रचार-प्रसार करने के लिए प्रदेश सरकार को पत्र भेजा है।