उत्तराखंड के लोहियाहेड के बाद किसानों ने अब तुमड़िया तथा नानकसागर डैम पर भी अपना हक जताने के लिए आवाज बुलंद कर दी है।
नानकसागर डैम पहुंचकर प्रदर्शन किया
किसान जगह-जगह लामबंद होने लगे हैं। किसानों ने शनिवार को काशीपुर में तुमड़िया और सितारगंज में नानकसागर डैम पहुंचकर प्रदर्शन किया। इसके अलावा खटीमा में यूपी सिंचाई विभाग द्वारा शारदा नहर में किए जा रहे डायवर्जन कार्य ग्रामीणों ने दूसरे दिन शनिवार को भी नहीं होने दिया।
इससे यूपी के जिन 10 जिलों में शारदा का पानी जाता है वहां सूखे के हालात हैं। प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों की मांग का खटीमा विधायक पुष्कर सिंह धामी ने भी समर्थन किया।
उत्तराखंड के पानी से यूपी में सिंचाई से गुस्साए भारतीय किसान यूनियन (यूथ विंग) के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र सिंह राणा के नेतृत्व में पदाधिकारियों एवं किसानों ने शनिवार को तुमड़िया डैम पहुंच कर सिंचाई विभाग के एई तरुण कुमार का घेराव कर यूपी को जाने वाले पानी को रोकने की धमकी दी तथा कहा यदि यूपी को पानी छोड़ा गया तो वे अधिकारियों को डैम क्षेत्र से खदेड़ देंगे।
इस पर भी बात नहीं बनी तो आंदोलन करेंगे। गुस्साए किसानों ने कहा कि डैम उत्तराखंड में है तो डैम का पानी उत्तराखंड के किसानों को ही मिलना चाहिए। राणा ने कहा कि जब प्रदेश के किसान सिंचाई को पानी मांगते हैं तो विभाग के अधिकारी डैम में कम पानी होने की बात कहकर टरका देते हैं।
राणा ने कहा कि यूपी और उत्तराखंड के बीच बंटवारे का जिम्मा नेताओं का है लेकिन उनकी ओर से सही पैरवी नहीं करने के चलते मामला कोर्ट में विचाराधीन है और इसमें किसान पिस रहे हैं। इस मौके पर भाकियू युवा विंग के कुमाऊं सचिव स्वप्निल, जिला उपाध्यक्ष अजीत चौधरी, शुभम, रजत राठी, अंकित, बिट्टू आदि मौजूद थे।
उधर, सितारगंज में भी भाकियू के नेतृत्व में किसानों ने नानकसागर डैम पर यूपी को पानी देने का विरोध करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया और डैम के गेट बंद कर पानी की निकासी बंद करा दी। विधायक डा. प्रेम सिंह राणा ने भी डैम पहुंचकर किसानों की मांग का समर्थन किया।
कहा कि वह इस मामले को विधानसभा में उठाएंगे। उन्होंने यूपी शासन से यहां की संपत्तियों को उत्तराखंड सरकार को सौंपने की मांग की तथा बरेली के अधीक्षण अभियंता ओपी शर्मा से डैम से पानी न छोड़ने को कहा। इस पर अधीक्षण अभियंता ने कहा कि संपत्ति पर अधिकार का मामला न्यायालय में चल रहा है।
विभाग इस मामले में कुछ नहीं कर सकता। डैम की क्षमता 697.5 क्यूसेक है। इससे ऊपर पानी होने पर निकासी करना मजबूरी है। कहा कि वह किसानों की मांग से यूपी शासन को अवगत कराएंगे। वहीं, यूनियन के ब्लाक अध्यक्ष गुरसाहब सिंह गिल ने कहा कि उत्तराखंड की सिंचाई संपत्ति उत्तर प्रदेश के अधीन है।
यहां के डैम अत्यंत जर्जर हालत में पहुंच गए हैं। डैमों के क्षतिग्रस्त होने पर यहां के लोगों को नुकसान उठाना पड़ता है और पानी का लाभ यूपी को होता है। कहा कि जब तक राज्य की सिंचाई संपत्तियों पर उत्तराखंड सरकार का अधिकार नहीं होता तब तक उत्तर प्रदेश को पानी न दिया जाए।
इस मौके पर भाजपा मंडल अध्यक्ष महेंद्र सिंह बड़वाल, बूटा सिंह, तरसेम सिंह, जसवंत सिंह, राजेंद्र सिंह, सुरजीत सिंह, अमर सिंह यादव, मजविंदर सिंह, जगदीश जोशी भी मौजूद थे।
परिसंपत्तियों के बंटवारे की लड़ाई आज से
उत्तराखंड और यूपी के बीच परिसंपत्तियों के बंटवारे और यूपी सिंचाई विभाग की मनमानी के खिलाफ लड़ाई रविवार से शुरू करेंगे। यह बात विधायक डा. शैलेंद्र मोहन सिंघल ने शनिवार को तहसील प्रांगण में आयोजित किसान चौपाल में एक मुलाकात में कही।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की कई नहरों, जलाशयों का नियंत्रण आज भी यूपी सिंचाई विभाग के पास है। उत्तराखंड के किसानों को सिंचाई के लिए यूपी के सिंचाई विभाग के अधिकारियों का मुंह ताकना पड़ता है, जबकि इनकी मरम्मत का खर्च उत्तराखंड उठाता है।
उन्होंने कहा कि परिसंपत्तियों के बंटवारे की लड़ाई वह रविवार से लड़ेंगे। विधायक डॉ. सिंघल ने बताया कि उत्तराखंड बनने के बाद से ही वह सरकारों के सम्मुख इस मुद्दे को उठाते रहे हैं।