उत्तराखंड विधानसभा सत्र की शुरुआत के साथ आम लोगों के लिए मुसीबतों का दौर भी शुरू हो गया।
बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं को हुई ज्यादा परेशानी
सोमवार को उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के विधानसभा कूच के दौरान लोगों को अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए लंबा सफर पैदल तय करना पड़ा। ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं को हुई।
यूकेडी के जुलूस के चलते दोपहर 1:10 बजे विधानसभा जाने वाले सभी रास्ते बंद कर दिए गए। इस कारण रिस्पना पुल से लेकर दयाल पैलेस चौराहे तक वाहनों का आवागमन बंद हो गया। करीब डेढ़ घंटे तक यही हालात रहे। प्रदर्शनकारी थोडा ठंडे हुए तो बैरियर के बीच का रास्ता खोलकर लोगों का निकाला गया।
इस दौरान धर्मपुर क्षेत्र, डिफेंस कॉलोनी और शास्त्रीनगर के लोगों को रिस्पना पुल से घर तक पैदल चलना पड़ा। वाहनों के इंतजार में दोनों तरफ यात्रियों की भीड़ जमा रही। यह स्थिति तब रही, जब सोमवार को केवल उक्रांद का प्रदर्शन था। मंगलवार को भाजपा के प्रदर्शन के दौरान मुसीबत बढ़ना तय है।
बीमार मां को गोद में ले गया बेटा
बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के अलावा मरीजों के लिए सोमवार का दिन कष्टदायक साबित हुआ। बीमारी से जूझ रही ज्वालापुर, हरिद्वार निवासी जमीला को परिजन उपचार के बाद घर ले जा रहे थे। रिस्पना पुल तक पहुंचने के लिए जमीला को उसका बेटा गोद में उठाकर ले गया।
एसपी ने पकड़ा नेत्रहीन का हाथ
प्रदर्शन के दौरान एक नेत्रहीन भी भीड़ में फंस गया था। वह लाठी के सहारे रास्ता पार करने की कोशिश कर रहा था, कि एसपी सिटी अजय सिंह की नजर उस पर पड़ गई। वे हाथ पकड़कर उसे कुछ दूर ले गए और फिर सिपाही की मदद से उसे बैरियर पार कराया।
लोगों की जुबानी
हरिद्वार में जरूरी काम था, लेकिन बस न मिलने से काफी देरी हो गई है। विधानसभा सत्र के दौरान लोगों को इस तरह परेशानी झेलनी पड़ती है। सरकार को जनता का दर्द समझना चहिए।
- रमेश सिन्हा
बाइपास रिंग रोड जाने के लिए डेढ़ किलोमीटर पैदल ही चलना पड़ा। विधानसभा सत्र के दौरान सरकार और पुलिस को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि लोगों को दिक्कत न हो।
- जनार्दन प्रसाद मिश्रा
विधानसभा सत्र के पहले दिन आधी-अधूरी तैयारी
विधानसभा सत्र के पहले दिन प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस आधी-अधूरी तैयारी के साथ नजर आई। यूकेडी कार्यकर्ताओं का जुलूस पहुंचा तो जवान हेलमेट और डंडा ढूंढते नजर आए। कई एसओ और दारोगा भी खाली हाथ पहुंचे थे।
प्रदर्शनकारियों को विधानसभा तक पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस ने बैरियर तो लगाए हैं, लेकिन पहले दिन पुलिस का सुरक्षा घेरा कमजोर नजर आया। पीएसी के जवान तो तैयारी से आए थे, लेकिन पुलिस के पास हेलमेट, डंडे तक नहीं थे।
सुरक्षा प्रभारी ने सिपाहियों को बिना हेलमेट और खाली हाथ देखकर कड़ी नाराजगी जताई। इसके बाद अधिकारियों कड़ी फटकार लगाई, तब जाकर हेलमेट और डंडे जुटाए गए।