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23 दिसंबर से मरीजों को निजी अस्पतालों में नहीं मिलेगा इलाज, भर्ती मरीजों की भी होगी छुट्टी

Thu, 20 Dec 2018 11:01 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
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Doctor - फोटो : social media
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क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट की जगह उत्तराखंड हेल्थकेयर एस्टेब्लिशमेंट एक्ट लागू करने की मांग को लेकर लामबंद निजी अस्पतालों के संचालक और चिकित्सक 23 दिसंबर की शाम से ओपीडी में मरीजों का इलाज बंद कर देंगे। यही नहीं चिकित्सकों ने 24 दिसंबर से नए मरीजों की भर्ती रोकने और पहले से भर्ती मरीजों की छुट्टी करने का एलान किया है।

 

25 दिसंबर को अस्पतालों में तालाबंदी कर स्वास्थ्य सेवाएं ठप कर दी जाएंगी। बुधवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की प्रदेश इकाई की ओर से बुलाई गई आपात बैठक में यह निर्णय लिया गया।

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आईएमए ने सरकार, शासन और स्वास्थ्य निदेशालय को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर 24 दिसंबर तक मुख्यमंत्री ने निजी चिकित्सकों को वार्ता के लिए नहीं बुलाया या मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो अगले दिन से अस्पतालों में तालाबंदी कर स्वास्थ्य सेवाओं को ठप कर दिया जाएगा।
 

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. बीएस जज और महासचिव डॉ. डीडी चौधरी की मौजूदगी में हुई प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में आंदोलन की रणनीति तय की गई। सहमति बनी कि 22 दिसंबर को सभी चिकित्सक काली पट्टी बांधकर मरीजों की जांच करेंगे।  23 दिसंबर की शाम को अस्पतालों की ओपीडी ठप कर दी जाएगी। 24 दिसंबर को भर्ती मरीजों को घर जाने को कहा जाएगा और इसके बाद मरीज अस्पतालों में भर्ती नहीं किए जाएंगे। 

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छोटे अस्पतालों को छूट और पंजीकरण शुल्क कम करने की मांग

आईएमए प्रदेश महासचिव डॉ. डीडी चौधरी का कहना है कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से वार्ता के बाद उनके निर्देश पर ही क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट की जगह उत्तराखंड हेल्थकेयर एस्टेब्लिशमेंट एक्ट का मसौदा तैयार किया गया था। स्वास्थ्य सचिव नितेश कुमार झा को मसौदा सौंप भी दिया गया। आईएमए की ओर से तैयार मसौदे को मुख्यमंत्री को सौंपने के लिए पिछले 15 दिन से समय मांगा जा रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर से समय नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में अब डॉक्टरों के सामने आंदोलन के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है। 

बैठक में आईएमए ने फिर मांग उठाई कि हरियाणा की तर्ज पर राज्य में संचालित 50 बेड तक के अस्पतालों को एक्ट में छूट दी जाए। साथ ही पंजीकरण शुल्क में कमी लाई जाए। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. बीएस जज ने कहा कि सरकार डॉक्टरों और नर्सिंगहोम संचालकों की मांगोें को दरकिनार कर अड़ियल रवैया अख्तियार कर रही है। ऐसे में अब डॉक्टराें के सामने अस्पताल को खुद ही बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि बड़े अस्पतालों के लिए तो क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट का पालन करना थोड़ा आसान है, लेकिन छोेटे अस्पतालों के लिए मुसीबत है। बता दें कि इससे पहले भी निजी अस्पताल संचालकों ने 13 नवंबर से तालाबंदी का एलान किया था। इसको देखते हुए मुख्यमंत्री ने आईएमए पदाधिकारियों को वार्ता के लिए बुुलाया था। उन्होंने पदाधिकारियों को ‘उत्तराखंड हेल्थकेयर एस्टेब्लिशमेंट एक्ट’ का मसौदा तैयार करने को कहा था। 
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