प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेपाल के दौरे से लौट आए, लेकिन भारत और नेपाल सीमा संबंधी कुछ अहम मामलों पर इस दौरे में कोई चर्चा नहीं हुई।
पंचेश्वर बांध निर्माण के साथ ही भारत और नेपाल के बीच कुछ अहम मुद्दे अभी लंबित हैं। इनमें सीमा पर प्रस्तावित पुलों का निर्माण प्रमुख है।
भारत-नेपाल समन्वय समिति की 15 अप्रैल 2014 को हुई बैठक में जिन मुद्दों पर चर्चा हुई थी, उनमें तवाघाट में नेपाल और भारत के नागरिकों के आवागमन के लिए नए झूलापुलों के निर्माण को शामिल किया गया था।
भारत सरकार के पास लंबित है झूलापुल निर्माण का प्रस्ताव
झूलापुल निर्माण का प्रस्ताव भारत सरकार के पास लंबित है। इसी तरह महाकाली में द्वालीसेरा के पास 120 मीटर लंबा झूलापुल बनाने का प्रस्ताव 2006 में तैयार हो गया था।
पुल के लिए 2.20 करोड़ रुपए मंजूर हुए, मगर जब तक भारत का विदेश और गृह मंत्रालय निर्माण की अनुमति नहीं देगा तब तक इसका निर्माण संभव नहीं है।
पीएम की नेपाल यात्रा के समय इस मसले पर कोई वार्ता नहीं हुई। डीएम एचसी सेमवाल का कहना है कि प्रदेश के मुख्य सचिव को पुलों के निर्माण के संबंध में रिपोर्ट पहले ही भेजी जा चुकी है।
मेले तक झूलापुल बनना संभव नहीं
नवंबर में होने वाले ऐतिहासिक और व्यापारिक महत्व के जौलजीबी मेले तक महाकाली में नए झूलापुल का निर्माण इस बार भी संभव नहीं हो पाएगा।
भारत सरकार पुल के निर्माण की मंजूरी दे चुकी है लेकिन नेपाल की तरफ से इसमें देरी हो रही है।
ऐसी स्थिति में नवंबर में एक बार फिर से प्रशासन को जौलजीबी में महाकाली पर अस्थायी पुल का निर्माण करना पड़ेगा। पिछले साल भी मेले को देखते हुए अस्थायी पुल बनाया गया था। यह पुल जून में बह गया है।