सरकार में रहते स्थायी राजधानी के मुद्दे पर पार्टियों का रूख स्पष्ट नहीं
राज्य आंदोलन के दौरान ही चमोली जिले में स्थित गैरसैंण को राजधानी बनाने का नारा दिया गया था। उत्तराखंड आंदोलन के परवान चढ़ते-चढ़ते गैरसैंण इसका केंद्र बिंदु बन गया लेकिन राज्य गठन के बाद स्थायी राजधानी को लेकर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस दोनों की सरकारें रहीं, लेकिन स्थायी राजधानी को लेकर अभी तक अपना रुख स्पष्ट नहीं कर पाई हैं। हालांकि विपक्ष में रहते हुए दोनों पार्टियां गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की बात करती रही हैं। इतना जरूर है कि बीते कुछ वर्षों में गैरसैंण में कभी कैबिनेट बैठक तो कभी विधानसभा सत्र आयोजित कर इस मुद्दे को जिंदा रखा गया है।
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त्रिवेंद्र ने की थी गैरसैंण में 25 हजार करोड़ के निवेश की घोषणा
पिछली सरकार में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गैरसैंण में 25 हजार करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की थी। लेकिन यह घोषणा भी परवान नहीं चढ़ पाई।