उत्तराखंड में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा के बीच मुख्यमंत्री के कई नजदीकी मंत्रियों की उम्मीदों ने उड़ान भर ली है।
सीएम विजय बहुगुणा के खास सूबेदार
अपने लिए एक बेहतर अवसर मानने वाले ये सभी सीएम विजय बहुगुणा के खास सूबेदार हैं। इन्हें उम्मीद है कि जिस तहर पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी के हटाए जाने के बाद उनकी पसंद को चुना गया।
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वैसा ही घटनाक्रम और इतिहास एक बार फिर दोहरा सकता है। ये सूबेदार यही मान रहे हैं कि यदि बहुगुणा की विदाई होती है तो उनके नाम पर दांव खेला जा सकता है।
मुख्यमंत्री के कई नजदीकी मंत्री राज्य में नेतृत्व परिवर्तन के इस गेम को अपने पक्ष में मान रहे हैं। ये सब अंदरखाने खुश भी हैं। सीएम के सबसे नजदीक माने जाने वाले इन मंत्रीगणों की ख्वाहिशें यूं ही हिलोरे नहीं ले रही है, इसके पीछे उत्तराखंड के राजनीतिक इतिहास में घटी एक घटना है।
मंत्रियों को है पूरी आस
सीएम के नजदीकी एक चर्चित मंत्री ने तो दिल्ली रवाना होने से पहले इस उम्मीद की अपने समर्थकों के साथ चर्चा भी की। सीएम को बताया कि उनकी लॉबिंग करने दिल्ली जा रहे है, लेकिन रणनीति यह है कि बहुगुणा कैंप का इतना विश्वास कर लो ताकि परिवर्तन के समय मुख्यमंत्री खुद ही उनका नाम प्रपोज कर दें।
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इसके अलावा रिजर्व नेचर वाले दूसरे मंत्री को भी पूरी आस है। वह जमाने से हरीश कैंप के विरोध माने जाते हैं। पिछले चुनाव में बड़े नेता को क्या शिकस्त दी, अरमान तो तभी से आसमान छूने लगे थे। इसलिए इन महाशय को भी दूसरे मंत्री की तरह ही पूरा भरोसा है।
ये सभी मंत्री खंडूड़ी के पहले बदलाव की कहानी अच्छी तरह जानते हैं। जब भाजपा में भगत सिंह कोश्यारी ने खंडूड़ी को बदलने का अभियान चलाया तो इसकी कमान त्रिवेंद्र व प्रकाश पंत के हाथ में थी।
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मौके की नजाकत को भांपते हुए रमेश पोखरियाल निशंक खुलकर खंडूड़ी के पाले में खड़े हो गए। बस खंडूड़ी ने अपने बदलाव की कीमत निशंक को सीएम बनाने के रूप में मांग ली।
अब यदि सूबे में नेतृत्व परिवर्तन होता है तो मंत्रियों को पुरानी कहानी दोहराने की उम्मीद है। उधर, कई मंत्रियों के दिल्ली होने ने ही माहौल को गर्म कर रखा है।