प्रदेश में अतिथि शिक्षकों पर सियासत हो रही है। संगठन की एकजुटता को देखते हुए भाजपा और कांग्रेस में इनकी मांगों को लेकर श्रेय लेने की होड़ मची है। दोनों ही दल इनके मामले को लेकर एक दूसरे को जमकर कोस रहे हैं और जिस तरह से इनके समर्थन में उतर आए हैं। इससे शिक्षा विभाग को अपने पूर्व के फैसले पर सोचना पड़ रहा है।
शिक्षा विभाग में अधिकतम 89 दिनों के लिए अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की गई। पुल तैयार कर इन शिक्षकों को पहाड़ के दूरदराज के स्कूलों में भेजा गया, लेकिन एलटी के चयनित 3089 और एलटी से प्रवक्ता के पद पर 1431 शिक्षकों के प्रमोशन का रास्ता साफ होने से इन पदों पर काम कर रहे अतिथि शिक्षकों को इससे झटका लगा।
विभाग ने नई नियुक्ति और प्रमोशन के पदों के भरने तक अतिथि शिक्षकों के समस्त पद रिक्त मान लिए। जिसके बाद से प्रदेश में अतिथि शिक्षकों पर सियासत गरमा गई है।
श्रेय लेने की होड़
भाजपा और कांग्रेस में तो श्रेय लेने की इस कदर होड़ मची है कि शनिवार को सुबह पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत इनके समर्थन में सांकेतिक धरने पर बैठे, वही शाम को सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी इनके समर्थन में उतर आए।
इसकी भी तो सुध ले कोई
731 स्कूलों के 74 हजार 729 बच्चों को बोर्ड परीक्षा से पहले अंग्रेजी की कोचिंग दी जा कसे इसके लिए एक दिसंबर वर्ष 2014 को केंद्र की मदद से उन्नति कार्यक्रम शुरू किया गया। इसके तहत स्कूलों में 731 शिक्षक रखे गए, लेकिन 2015-16 में केंद्र से योजना से हाथ खींच लिए। राज्य सरकार ने अपने दम पर इसे शुरू करने की घोषणा की, लेकिन अब तक न केंद्र न ही राज्य की ओर से 74 हजार से अधिक बच्चों की अब तक सुध ली जा सकी है।
910 शिक्षा आचार्यों के समायोजन का मामला भी लटका
प्रदेश में 910 शिक्षा आचार्यों का शिक्षा मित्र में समायोजन होना था, दो बार यह मामला कैबिनेट बैठक में आ चुका है, लेकिन कैबिनेट के फैसले के बावजूद शिक्षा आचार्यों का शिक्षा मित्र में समायोजन का जीओ जारी नहीं हो पाया है।
स्कूलों में शिक्षक नहीं
प्रदेश में पिछले कई दिनो से चल रहे 6214 गेस्ट टीचरों के आंदोलन से पहाड़ के दूरदराज के स्कूल खाली हो गए हैं। गेस्ट टीचर दून में डटे हैं, वहीं स्कूलों में शिक्षक नहीं है।
बिजली, पानी की समस्या की सुध लेता कोई
प्रदेश के 700 से अधिक स्कूल जर्जर हाल बने हैं, सैकड़ों स्कूलों में बिजली और पानी नहीं है, जरूरी संसाधनों की कमी बनी है, लेकिन कोई भी सियासी दल अब तक इस मसले पर आगे नहीं आया।
इनका है कहना
विभाग में चयनित नियमित शिक्षकों की नियुक्ति के बाद भी शिक्षकों के कई पद रिक्त रह जाएंगे। रिक्त समस्त पदों पर अतिथि शिक्षकों को रखा जाएगा।
-डी सेंथिल पांडियन शिक्षा सचिव
अतिथि शिक्षकों की तैनाती कितने पदों पर होगी इसकी कोई निश्चित संख्या नहीं है, पुल में समस्त शिक्षक रखे जा सकते हैं, इसके बाद जहां जितनी जरूरत होगी शिक्षकों की तैनाती की जाएगी।
-आरके कुंवर, शिक्षा निदेशक