देहरादून। ऑपरेशन स्माइल के तहत पुलिस ने एक साल में 1072 बिछुड़े लोगों को उनके परिवारों से मिलवाया है। इनमें 345 बच्चे और 397 महिलाएं शामिल हैं। मंगलवार को डीजीपी ने इन गुमशुदा लोगों को तलाशने वाली 12 टीमों को पुरस्कृत करने की घोषणा भी की है। साथ ही आने वाले समारोह आदि पर उनके नाम मेडल के लिए भी भेजे जाएंगे।
डीजीपी अशोक कुमार ने सोमवार को पुलिस मुख्यालय में ऑपरेशन स्माइल के तहत की गई कार्रवाई की समीक्षा की थी। इस दौरान उन्होंने बताया कि ऑपरेशन स्माइल 2015 से चलाया जा रहा है लेकिन इस साल सबसे अधिक 1072 गुमशुदा लोगों को तलाश किया गया है। यह भी केवल तीन माह के अभियान के तहत कार्रवाई हुई है। अभियान के तहत देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल में एक-एक टीम बनाई गई थीं। जबकि रेलवे में भी एक टीम का गठन किया गया था। प्रत्येक टीम में एक दरोगा और चार कांस्टेबल शामिल थे। इनके साथ एक अभियोजन अधिकारी भी तैनात किया गया था।
डीजीपी ने बताया कि इस अभियान के तहत 196 बालक, 149 बालिकाएं, 330 पुरुष और 397 महिलाओं को तलाश किया गया। कुल 1072 बरामद लोगों में से 1053 गुमशुदाओं को परिजनों के सुपुर्द किया गया। बरामद में से 791 पंजीकृत (उत्तराखंड-776, अन्य राज्य-15) और 281 अपंजीकृत (उत्तराखंड-121, अन्य राज्य-160) हैं। इस अभियान में सबसे अधिक ऊधमसिंह नगर ने 275 गुमशुदाओं को तलाश किया है। गोष्ठी के दौरान अभियान में सम्मिलित पुलिसकर्मियों दरोगा कृपाल सिंह जनपद पौड़ी गढ़वाल, दरोगा जनार्दन भट्ट जनपद ऊधमसिंह नगर, दरोगा देवेंद्र थपलियाल जीआरपी, देहरादून, कांस्टेबल मनोज शर्मा एएचटीयू, टिहरी गढ़वाल ने अपने अनुभवों को साझा किया।