देहरादून में कच्छाधारी बदमाशों की अफवाहों से हो रही मुठभेड़ में पुलिस अब बैक फुट में आ गई है।
पुलिस अधिकारियों ने गांव के लोगों को अपनी लाइसेंसी असलहों से गांव की सुरक्षा करने की अनुमति दे दी है। अब गांव में ग्राम सुरक्षा समिति जबकि शहर में मोहल्ला सुरक्षा समिति के हथियार बंद दस्ते सुरक्षा के लिए उतरेंगे।
यह दस्ते चीता पुलिस के जवानों से समन्वय बनाकर गश्त करेंगे। हालांकि दस्ते में केवल वह ही लोग होंगे जो क्षेत्र में जिम्मेदार नागरिक के रूप में पहचान रखता हो।
कई कवायदों के बाद भी अफवाहों को बाजार ठंडा नहीं हो रहा। पुलिस हर दिन कॉम्बिंग कर रही है और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही उन्हें जागरूक भी किया जा रहा है। लेकिन, अफवाहों ने लोगों पर इस कदर असर किया है कि वह घरों से बाहर निकल कर रात भर गश्त कर रहे हैं।
गांव में सुरक्षा टोलियां बनी
इस काम के लिए गांव में सुरक्षा टोलियां बनी हुई है। लेकिन देखा गया है कि कई सुरक्षा टोलियों के पास तलवार और अन्य धारदार हथियार थे। जबकि कई शराब के नशे में धुत रहते हैं। ऐसे में कभी भी कोई बेकसूर इन टोलियों के हत्थे चढ़कर पिट सकता है।
इन्हीं सब चिंताओं के मद्देनजर पुलिस ने अब निर्णय लिया है कि गांव की सुरक्षा के लिए टोलियां गश्त जरूर करें। लेकिन उनमें जिम्मेदार नागरिक हों। इन जिम्मेदार नागरिकों के पास अगर लाइसेंसी बंदूक है तो उसे साथ लेकर गश्त कर सकते हैं। लेकिन अगर उसका गलत उपयोग हुआ तो कार्रवाई भी कड़ी होगी।
इन टोलियों में जो भी सदस्य होंगे, उसका विवरण उस क्षेत्र के थानाध्यक्ष के संज्ञान में होना चाहिए। एसपी सिटी डा. जगदीश चंद्र ने बताया गांव में ग्राम सुरक्षा समिति और शहर मेहं मोहल्ला सुरक्षा समिति बनेगी। इन लोगों को क्षेत्र के थाना और चीता पुलिस के संपर्क में रहना होगा। जैसी ही कोई घटना होगी, यह टोली पुलिस को रिपोर्ट करेगी।
राजपुर में भी अफवाह
अभी तक शहर का निचला हिस्सा अफवाहों से पीड़ित था। लेकिन बृहस्पतिवार देर रात को अफवाह राजपुर क्षेत्र के गांवों में भी पहुंच गई। क्षेत्र में अचानक दहशत फैल गई कि बदमाश घुस आए हैं। इसके बाद लोग घरों से बाहर निकल आए और टॉर्च और लाठियां लेकर गश्त करने लगे।
दहशत ने दिया बेरोजगारों को काम
कच्छा बनियान गिरोह की अफवाह ने जहां पुलिस और लोगों की नींद खराब कर रखी है। वहीं कुछ ऐसे भी है जिनकी इज्जत में चार चांद लग गए हैं। दरअसल, गांव के कुछ बेरोजगार युवकों को बुजुर्गों ने निठल्ला की उपाधि से नवाजा हुआ था। लेकिन अब ये ही युवक हाथों में डंडे लिए गांव की रखवाली कर रहे हैं तो बुजुर्ग उन्हें आशीर्वाद देने के साथ उनकी तारीफें करते नहीं थक रहे।
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