जनहित के मुद्दों पर खुली चिट्ठी लिखकर राज्य सरकार को घेरने वाले हरिद्वार सांसद हरीश रावत के हाथ में अब प्रदेश की कमान आ गई है।
अब चिट्ठियों में उठाए जाने वाले मुद्दों उनके आदेश की जद में आ गए हैं। जिले के आमोखास को उम्मीद है कि चिट्ठी के लिफाफे में दबे सभी मुद्दे अब मुख्यमंत्री का आदेश बनकर बाहर निकलेंगे।
लड़ते रहे थे पार्टी की सरकार से
हरिद्वार के सांसद के तौर पर हरीश रावत लगातार अपनी ही पार्टी की सरकार से लड़ते रहे हैं। गन्ना किसानों का बकाया मूल्य हो या जिले को बाढ़ प्रभावित घोषित करने की मांग, रावत ने मजबूती के साथ सरकार के सामने मांग उठाई।
कई मुद्दों पर सीएम को लिखी गई उनकी चिट्ठी ने प्रदेश की राजनीति में खूब हलचल पैदा की। उनकी चिट्ठी को लेटर बम का नाम दिया गया। तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के साथ कई बार जुबानी जंग हुई तो इशारों में सतत संघर्ष चलता रहा।
स्थानीय मुद्दों को उठाते रहे
मंशा पर भले ही कोई सवाल उठाए, लेकिन माध्यम स्थानीय जनता के हित के मुद्दे ही बने। शनिवार शाम हरीश रावत ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली तो उनकी भूमिका भी बदल गई।
अभी तक चिट्ठी लिखकर सरकार से मांग करने वाले सांसद हरीश रावत आदेश जारी कर जनता की मांग पूरी करने वाले सीएम हरीश रावत बन गए हैं।
इनका है कहना
प्रदेश हित में लिया गया यह सबसे महत्वपूर्ण फैसला है। हरीश रावत जी जो मुद्दे राज्य सरकार के सामने उठाते रहे हैं, उन सबको पूरा किया जाएगा। हर मुद्दा उनके संज्ञान में है। जल्द ही काम धरातल पर दिखेंगे।
-चौ. राजेंद्र सिंह, जिलाध्यक्ष कांग्रेस कमेटी।
हरीश रावत जब तक मुख्यमंत्री नहीं बने थे, अपनी ही सरकार से लड़ते रहे। हम चाहते हैं कि वह अब सारे काम करके दिखाएं। लक्सर क्षेत्र को बाढ़ प्रभावित घोषित कर यहां किसानों के कर्ज माफ किए जाने चाहिए। हम पहले भी सरकार के सामने यह मांग उठाते रहे हैं। नए मुख्यमंत्री के सामने भी हम पुरजोर तरीके से मांग उठाएंगे।
-संजय गुप्ता, भाजपा विधायक, लक्सर।