आधार कार्ड बनाने के लिए देहरादून के लोगों को कई चक्कर काटने पड़ रहे हैं। यह हाल तब है, जबकि इसके लिए अलग से कैंप लगाए गए हैं।
असल दिक्कत संबंधित आवेदक को सत्यापित करने में हो रही है। नगर निगम और तहसील के प्रगणकों के कैंपों में न आने से लोग परेशान हो रहे हैं। दूसरी ओर, वार्डों में कैंप लगाने के लिए कंपनी को जगह नहीं मिल रही। वहीं, चकराता और कालसी तहसील में तो अब तक कार्ड बनाने का काम शुरू नहीं हो सका है।
आधार कार्ड बनने के लिए व्यक्ति का नाम जनसंख्या रजिस्टर में होना चाहिए। इसके अलावा राशन कार्ड, निवास आदि से संबंधित दूसरे कागजात प्रगणक से सत्यापित कराने अनिवार्य हैं। लोगों की सहूलियत के लिए जनसंख्या रजिस्टर में नाम दर्ज कराने का काम नगर निगम और तहसील में बांट दिया गया है लेकिन दोनों विभागों के कर्मचारी लापरवाह बने हुए हैं।
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आलम यह है कि कर्मचारी कैंपों में जा ही नहीं रहे हैं। इससे कागजात का सत्यापन न होने से लोग बिना कार्ड बनवाए लौट रहे हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत उन क्षेत्रों में हैं जो आधे तहसील और आधे नगर निगम में हैं।
आधार कार्ड बना रही इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ईसीआईएल) के सूत्रों का कहना है कि नवंबर से काम शुरू होने के बावजूद अब तक लक्ष्य के सापेक्ष दस फीसदी कार्ड ही बन सके हैं।
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बताया गया कि वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर कार्ड बन रहे हैं। ऋषिकेश और देहरादून में काम चल रहा है। कालसी और चकराता में तो अभी काम ही शुरु नहीं हो पाया है।
नगरीय सीमा में आधार कार्ड का काम नगर निगम और ग्रामीण क्षेत्र में तहसील के जिम्मे है। लोग नगर निगम और तहसील में जाकर अधिकारियों से पता करें कि उनके क्षेत्र का प्रगणक (घर-घर जाकर गिनती करने वाला) कौन है।
- झरना कमठान, एडीएम वित्त
आधार कार्ड के लिए प्रत्येक वार्ड में कैंप लगने हैं। जहां सरकारी स्कूल हैं वहां तो जगह मिलती है, लेकिन बाकी वार्ड में दिक्कत है। कैंप में 15-20 दिन लगते हैं। चकराता-कालसी में जल्दी काम शुरु हो जाएगा।
- जेडए खान, सीनियर डिप्टी मैनेजर, ईसीआईएल
अभी यहां कैंप लगे हैं
-नगर निगम क्षेत्र: पटेलनगर, तिलक रोड और ब्रह्मपुरी
-तहसील क्षेत्र: रत्तूवाला, बालावाला
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