सड़क मार्ग से कट चुके गबनीगांव चंद्रापुरी के लोगों को अधिकारी के नाम पर पटवारी ही दिखाई दे रहा है। स्थिति यह है कि अब लोग नेताओं के देखकर घर के दरवाजे बंद करने लगे हैं।
मैं गंगतल से पैदल चलकर किसी तरह गबनी गांव पहुंचा। यहां गेस्ट हाउस में रुका। एक घंटे जेनरेटर चला, तो आस-पास के 10-15 परिवार के लोग मोबाइल फोन लेकर चार्ज करने पहुंचे। किसी तरह रात काटी। सुबह अखोड़ी घनसाली निवासी राम सिंह नेगी की दुकान में चाय पी। उन्होंने बताया कि 40 वर्ष दिल्ली में गुजारने के बाद दस साल पूर्व उन्हाेंने केदारनाथ यात्रा रूट को देखते हुए मकान बनाया था।
बचा राशन खत्म होने को
पिताजी की इच्छा थी कि गांव जाना है, इसलिए पहाड़ की ओर आ गए। बाहर से जो मदद मिल रही है। उसके लिए कंडारा रोड तक जाना पड़ रहा है, जो चार किमी पैदल है। यहीं पर हमें सरोजनी नेगी मिली। उन्होंने बताया कि कोई नेता उन्हें पूछने तक नहीं आ रहा है। बचा राशन खत्म होने को है। यहां से मैं आगे गया। गबनी गांव से चंद्रापुरी तक केदारनाथ एनएच पूरा बह चुका है।
चंद्रापुरी बाजार (भटवाड़ी सुनार) पहुंचकर मैं अमर उजाला अखबार के एजेंट विश्वमित्र भट्ट को ढूंढने लगा, तो पता चला की मंदाकिनी की बाढ़ में उसकी दुकान बह गई है। यहां लोगों ने बताया कि संतलाल अपने बेटे विजय लाल को लेकर केदारनाथ यात्रा में कमाने गए थे। दोनों बाप-बेटे खच्चर चलाते थे।
प्रशासन अहैतुक धनराशि आठ हजार नहीं दे रहा
16 को बाप-बेटे रामबाड़ा में बह गए, 17 को भटवाड़ी सुनार में उनका घर भी बह गया। अब घर में बचे हैं, तो संतलाल की पत्नी शांति और बड़ा बेटा हर्षलाल। दोनों ही पंचायत घर में किसी तरह घर चला रहे हैं। चंद्रापुरी में लोगों ने शिकायत की कि किराएदारों को प्रशासन अहैतुक धनराशि आठ हजार नहीं दे रहा है, जबकि अन्य स्थानों में सबको मिली है।