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हार्टअटैक के मरीज के लिए ‘जीवनदायिनी’ बनी 'काल'

Tue, 17 Mar 2015 12:20 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, सेलाकुई
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देहरादून जिले के सेलाकुई में जीवनदायिनी साबित हो रही 108 एंबुलेंस पर जान लेने का आरोप लगा है। डॉक्टर के हायर सेंटर रेफर करने के बावजूद 108 कर्मी मरीज को दून अस्पताल नहीं ले गए।
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) सहसपुर में मरीज ने दम तोड़ दिया। परिजनों का कहना है कि यदि 108 से मरीज को सीधे दून अस्पताल ले जाया गया होता तो उसकी जान बच सकती थी। विरोध में परिजन और ग्रामीणों ने 108 के खिलाफ प्रदर्शन कर हंगामा काटा। सीएमओ से भी शिकायत की।

सीएमओ के आश्वासन के बाद लोग शांत हुए। उधर, 108 प्रबंधन ने आरोपों को गलत बताया है। मूल रूप से गंधरपुर थाना सिंधौली जिला शाहजहांपुर उत्तर प्रदेश निवासी रशीद (48) पुत्र नबी हसन परिवार समेत शंकरपुर गांव में हाजी सलीम के यहां 7-8 साल से किराये पर रह रहा था। वह मजदूरी करता था।
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परिजनों के पास नहीं थे किराए के लिए रुपए

सोमवार सुबह करीब 10 बजे उसे सीने में दर्द की शिकायत हुई। पत्नी मसनादी उसे लेकर सीएचसी सहसपुर पहुंची। जहां डॉ. किरन ने मरीज की हालत को देखते हुए दून अस्पताल रेफर कर दिया। उस दौरान जेब में किराये के पैसे न होने पर परिजन उसे लेकर घर लौट गए।

दोपहर करीब एक बजे रशीद की हालत फिर बिगड़ गई। परिजनों ने 108 को फोन किया। वहां पहुंची 108 मरीज को लेकर सीएचसी सहसपुर की ओर चल पड़ी। आरोप है कि परिजनों ने मरीज को दून अस्पताल ले जाने की गुहार लगाई।

उन्होंने डॉक्टर द्वारा हायर सेंटर रेफर करने की बात भी बताई, लेकिन 108 कर्मी दून अस्पताल के बजाय उसे सीएचसी सहसपुर ले गए। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत बताया। मौत हार्टअटैक से बताई जा रही है।

फोन करने के चार मिनट बाद ही 108 मौके पर पहुंच गई थी, जब कर्मियों ने रशीद का चेकअप किया गया तो उसमें जान नहीं थी। बावजूद इसके सीपीआर दिया गया। ऐसे में पास के अस्पताल ले जाने के सिवाय कोई दूसरा चारा नहीं था।
- मनीष टिक्कू, प्रादेशिक हेड 108 एंबुलेंस
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