नेपाल और भारत के संयुक्त प्रयासों से प्रस्तावित बहुप्रतीक्षित पंचेश्वर बांध और जलविद्युत परियोजना पर बातचीत आगे बढ़ने पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने खुशी जताई है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नेपाल यात्रा के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने का स्वागत किया है। कहा कि यात्रा से नेपाल की लीडरशिप के रवैए और नजरिए में भी बदलाव आया है। अब दोनों देशों को चाहिए कि यह परियोजना आकार ले ले।
केंद्र सरकार करे पुनर्वास में मदद
गौरतलब हो कि करीब 35 सौ मेगावाट की पंचेश्वर परियोजना को लेकर लंबे समय से नेपाल के साथ बातचीत चल रही है। मुख्यमंत्री का कहना है कि इस परियोजना में पंचेश्वर इलाके के बड़ी संख्या में गांव प्रभावित होंगे।
उत्तराखंड इस तरह का राज्य नहीं है कि जो इतनी बड़ी संख्या में होने वाले विस्थापन को अकेले दम पर सफलतापूर्वक पूरा कर सके। इसके लिए केंद्र सरकार को आगे आना पड़ेगा ताकि टिहरी जैसे हालात न हों। टिहरी में अभी तक कठिनाइयां बनी हुई हैं। हमने टिहरी से सीख ली है।
उत्तराखंड की पचास फीसदी हिस्सेदारी की मांग
सीएम का कहना है कि उत्तराखंड मेजर स्टॉक होल्डर है। इस योजना में पचास फीसदी की हिस्सेदारी होनी चाहिए। टिहरी से 12.1 प्रतिशत बिजली मिलती है जबकि इस परियोजना में राज्य की हिस्सेदारी अधिक होनी चाहिए।
बांध बनने से होने वाले विस्थापन का बहुत खर्च आएगा और विस्थापन का काम दीर्घकालिक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस परियोजना पर पहले ही सर्वेक्षण हो चुका है। सीएम का कहना है कि अब करनाली, बूढ़ी गंडक और कोसी पर परियोजनाओं का सर्वेक्षण होना चाहिए।