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पंचायतों ने दिग्गजों को सिखाई सियासत

Thu, 12 Jun 2014 01:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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पंचायतें ही हैं जिन्होंने उत्तराखंड के कई सियासी दिग्गजों को सियासत का ककहरा सिखाया हैं।
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उत्तराखंड के मुखिया का ताज संभाल रहे मुख्यमंत्री हरीश रावत भी खुद पंचायत की पाठशाला में राजनीति का ककहरा सीख पाए। पंचायत मंत्री प्रीतम सिंह को भी पंचायत राजनीति ने ही ब्रेक दिया।

पंचायतों ने पहुंचाया शिखर पर
पूर्व पंचायत मंत्री और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बिशन सिंह चुफाल भी पंचायत के मोरचे पर आगे बढ़े। प्रदेश की सियासत में ऐसे कई उदाहरण हैं जिन्हें पंचायतों ने शिखर पर पहुंचाया।
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मुख्यमंत्री हरीश रावत ने ट्रेड यूनियनों और कांग्रेस का दामन थामने से पहले पंचायत राजनीति में सक्रिय रहकर सियासत केगुर सीखे।

1980 से पहले रावत पंचायत राजनीति में खासे सक्रिय रहे और ग्राम प्रधान से लेकर ब्लॉक प्रमुख तक का सफर उन्होंने तय किया। प्रदेश के वर्तमान पंचायत मंत्री प्रीतम सिंह भी पंचायत में खासे सक्रिय रहे।

प्रीतम सिंह ब्लॉक प्रमुख रहे। प्रीतम ने भी कांग्रेस का दामन थामने से पहले पंचायतों में खासी सक्रियता दिखाई। वर्तमान में शहरी विकास मंत्री प्रीतम पंवार का भी यही हाल रहा।

पंचायतों में सक्रिय रहकर आगे बढ़ने के मामले में खासा दिलचस्प सफर मंत्री प्रसाद नैथानी का रहा।

पंचायतों की पाठशाला में राजनीति का ककहरा
कैबिनेट मिनिस्टर मंत्री प्रसाद नैथानी 1980 के दौरान ब्लॉक प्रमुख का चुनाव भी लड़े थे और पूर्व मंत्री मातबर सिंह कंडारी से एक वोट से चुनाव हार गए थे। पर पंचायत में मंत्री की सक्रियता लगातार बनी रही।

पूर्व पंचायत मंत्री और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे बिशन सिंह चुफाल भी प्रधान रहे। पूर्व शिक्षा मंत्री खजान दास भी  ग्राम प्रधान रहे। यही हाल पूर्व पंचायत मंत्री और कांग्रेस में दायित्व संभाल रहे राजेंद्र भंडारी का भी है।
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पूर्व परिवहन मंत्री रहे हीरा सिंह बिष्ट ने भी ग्राम प्रधान के रूप में अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की। विधायकों पर नजर दौड़ाएं तो शैलारानी रावत, दिलीप रावत सहित कई ऐसे नाम हैं जिन्होंने राजनीति का ककहरा पंचायतों की पाठशाला में पढ़ा।
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